गढ़चिरौली/बीजापुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर एक बार फिर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ चल रही है। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की भामरागढ़ तहसील क्षेत्र में हुई इस मुठभेड़ में C-60 कमांडोज ने 3 नक्सलियों को मार गिराया है। हालांकि इस कार्रवाई में C-60 का एक जवान शहीद हो गया, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुआ है।
मुठभेड़ की आधिकारिक पुष्टि महाराष्ट्र पुलिस ने कर दी है। मौके से एक AK-47 और एक SLR राइफल भी बरामद की गई है। मारे गए नक्सलियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
अबूझमाड़ के जंगलों में हुआ आमना-सामना
जानकारी के मुताबिक 6 फरवरी की सुबह सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम अबूझमाड़ के घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई।

इस मुठभेड़ में C-60 कमांडोज के कॉन्स्टेबल दीपक चिन्ना मदावी (38 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल हेलीकॉप्टर से भामरागढ़ उप-जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
शहीद दीपक चिन्ना मदावी की शहादत से पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर है। वहीं घायल जवान का इलाज जारी है।
बरामद हथियार, इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज
एनकाउंटर स्थल से सुरक्षाबलों ने AK-47 और SLR राइफल बरामद की है, जिससे यह साफ है कि मारे गए नक्सली किसी बड़े कैडर से जुड़े हो सकते हैं। मुठभेड़ के बाद इलाके में अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई है और सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि अन्य नक्सलियों को घेरा जा सके।
एक दिन पहले भी बड़ा एनकाउंटर
गौरतलब है कि एक दिन पहले 5 फरवरी को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए नक्सली कमांडर उधम सिंह को ढेर किया था। उधम सिंह DVCM रैंक का नक्सली था और प्लाटून नंबर-30 का कमांडर होने के साथ-साथ जगरगुंडा एरिया कमेटी का प्रमुख भी था।
उधम सिंह पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था और वह 2021 के टेकुलगुड़ेम एनकाउंटर में शामिल था, जिसमें नक्सली हमले में 22 जवान शहीद हुए थे।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी कामयाबी
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के अनुसार,
- 2025 में जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में 163 माओवादी मारे गए।
- 2026 में अब तक 11 नक्सली ढेर किए जा चुके हैं।
- जनवरी 2024 से अब तक कुल 232 नक्सली मारे गए,
1163 गिरफ्तार हुए और
888 नक्सलियों ने सरेंडर कर मुख्यधारा में वापसी की है।
ये आंकड़े बताते हैं कि नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की रणनीति लगातार असरदार साबित हो रही है।

इन टॉप नक्सली नेताओं की तलाश जारी
सुरक्षाबलों की नजर अब नक्सल संगठन के शीर्ष नेताओं पर है—
1. थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61)
तेलंगाना निवासी देवजी वर्तमान में नक्सल संगठन का महासचिव और पोलित ब्यूरो मेंबर है। बसवाराजू के मारे जाने के बाद उसे यह जिम्मेदारी दी गई। सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही इस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है।
2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74)
नक्सल संगठन का पूर्व महासचिव। उम्र और बीमारी के कारण उसने कुछ साल पहले पद छोड़ा था। इस पर भी 1 करोड़ से अधिक का इनाम है।

3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62)
झारखंड निवासी, नक्सल संगठन का पोलित ब्यूरो मेंबर और ERB का इंचार्ज। इस पर भी करोड़ों का इनाम घोषित है।
4. पापा राव उर्फ मंगू (56)
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी। यह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज है। AK-47 से लैस पापाराव बस्तर के जंगलों का गहरा जानकार है। सुरक्षाबलों का मानना है कि इसके मारे जाने या सरेंडर करने से नक्सलियों की पश्चिम बस्तर कमेटी लगभग खत्म हो जाएगी।
शहादत और संकल्प
छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर लगातार हो रही ये मुठभेड़ें साफ संकेत देती हैं कि नक्सलियों का नेटवर्क अब दबाव में है। हालांकि शहीद जवान की कुर्बानी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि यह लड़ाई आसान नहीं है। सुरक्षाबलों का कहना है कि शहीद दीपक चिन्ना मदावी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।