छिंदवाड़ा। जहरीले कफ सिरप के सेवन से 26 बच्चों की मौत के मामले में मुआवजे को लेकर नया तकनीकी विवाद सामने आया है। राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में मुआवजा अदालत तय करती है और दोषी कंपनी पर लगाए गए जुर्माने की राशि से ही पीड़ितों को भुगतान किया जाएगा।
संसद में केंद्र का जवाब
राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ‘औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940’ की धारा 32ख के तहत यदि मिलावटी या नकली दवाओं से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो न्यायालय दोषी व्यक्ति या कंपनी पर जुर्माना लगाएगा। उसी जुर्माने की राशि से पीड़ितों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर किसी अलग या विशेष ‘मुआवजा कोष’ की घोषणा का उल्लेख नहीं किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कानूनी मुआवजे की प्रक्रिया पूरी तरह न्यायालय पर निर्भर रहेगी।
एमपी सरकार की आर्थिक सहायता का जिक्र नहीं
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। छिंदवाड़ा जिला प्रशासन के अनुसार, यह राशि कई परिवारों के खातों में हस्तांतरित भी की जा चुकी है। हालांकि, संसद में दिए गए जवाब में राज्य सरकार द्वारा दी गई इस सहायता राशि का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

तात्कालिक सहायता बनाम कानूनी मुआवजा
राज्य सरकार द्वारा दी गई ₹4 लाख की राशि को ‘तात्कालिक आर्थिक सहायता’ माना जा रहा है, जबकि संसद में जिस मुआवजे की बात कही गई है, वह ‘कानूनी मुआवजा’ है। यह मुआवजा लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद दोषी कंपनी से वसूले गए जुर्माने के आधार पर मिलेगा।
कोर्ट के फैसले का इंतजार
कानून के अनुसार, जब तक अदालत में सुनवाई पूरी नहीं होती और संबंधित कंपनी या जिम्मेदार पक्ष को दोषी करार नहीं दिया जाता, तब तक आधिकारिक मुआवजे की राशि तय नहीं की जा सकती। यानी पीड़ित परिवारों को अंतिम कानूनी क्षतिपूर्ति के लिए न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने मुआवजा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर राज्य सरकार ने तत्काल राहत दी है, वहीं कानूनी मुआवजे के लिए अब अदालत के निर्णय पर नजरें टिकी हैं।