छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश: छिंदवाड़ा के लालबाग इलाके में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक मां ने अपनी दोनों बेटियों को बेरहमी से पीटा। इस घटना में एक बेटी की मौत हो गई, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल है। मां ने भी फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया है। यह घटना बुधवार दोपहर की बताई जा रही है।

घटना का विवरण:
शाम को जब पति सुमित साहू घर लौटे, तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था। उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर जाकर देखा तो पत्नी निशा साहू (32 वर्ष) और दोनों बेटियां बेहोश हालत में पड़ी थीं। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से सभी को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने छोटी बेटी नम्रता (ढाई वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। वहीं, मां निशा और बड़ी बेटी अमृता (10 वर्ष) का इलाज चल रहा है।
बड़ी बेटी का बयान:
अस्पताल में भर्ती अमृता ने बताया कि उसकी मां ने उसे तवे से मारा और वह सीढ़ी से गिर गई, जिसके कारण उसके सिर पर चोट आ गई। उसने यह भी बताया कि उसकी मां ने छोटी बहन नम्रता को भी बेरहमी से पीटा, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। अमृता ने कहा, “मेरी छोटी बहन अब इस दुनिया में नहीं रही।”

पड़ोसियों का बयान:
पड़ोसी शैलेन्द्र करोसिया ने बताया कि शाम 4 बजे सुमित साहू जब घर लौटे तो घर का दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने अपने साले को फोन कर घर बुलाया और दरवाजा तोड़ा। पड़ोसी ने यह भी बताया कि महिला ने अपनी दोनों बेटियों की बेरहमी से पिटाई की और खुद फिनाइल पी लिया। हालांकि, पड़ोस में मकान के स्लैब के लिए चल रही मिक्सर मशीन की आवाज के कारण किसी को बच्चियों की चीख सुनाई नहीं दी। पड़ोसी ने यह भी बताया कि अक्सर पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था।
पुलिस की जांच:
कोतवाली थाना टीआई उमेश गोलहानी ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पारिवारिक कलह इस घटना का कारण बताया जा रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और जल्द ही पूरी घटना की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

परिवार की स्थिति:
मृतक नम्रता के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां निशा और बड़ी बेटी अमृता का इलाज अस्पताल में चल रहा है। पति सुमित साहू इस घटना से बेहद आहत हैं और परिवार के सदस्यों के साथ अस्पताल में मौजूद हैं।
समाज और प्रशासन की भूमिका:
इस घटना ने समाज में एक बार फिर से पारिवारिक हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को उजागर किया है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को ऐसे मामलों में तत्परता से कार्य करने की आवश्यकता है ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

छिंदवाड़ा की यह घटना एक बार फिर से समाज के सामने पारिवारिक हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य के गंभीर मुद्दों को लेकर आई है। पुलिस की जांच के बाद ही इस घटना के सही कारणों का पता चल पाएगा, लेकिन यह घटना समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ऐसे मामलों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और पीड़ितों को समय पर सहायता प्रदान की जाए।