जबलपुर में पीने के पानी को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस के दावे और महापौर आमने-सामने !

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जबलपुर: मध्यप्रदेश के इंदौर में सामने आए दूषित पानी कांड के बाद अब पूरे प्रदेश में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर राजनीति गरमा गई है। इसी कड़ी में जबलपुर में भी पानी की सप्लाई को लेकर सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस जिला इकाई और नगर निगम प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

कुछ दिन पहले कांग्रेस की जबलपुर जिला इकाई ने शहर में घर-घर पहुंच रहे पीने के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। इस संबंध में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग इलाकों में जाकर घरों से पानी के सैंपल एकत्र किए थे। अब दो दिन बाद उन सैंपलों को कलेक्ट कर लिया गया है, जिसके बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।

महापौर के वार्ड से लिए गए सैंपल, कांग्रेस का बड़ा दावा
कांग्रेस का दावा है कि उन्होंने जानबूझकर इस सैंपल कलेक्शन के लिए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के ही वार्ड को चुना था। यहां 100 से अधिक घरों से पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें से 60 से ज्यादा सैंपल अमानक पाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आंकड़े महापौर के उस दावे को पूरी तरह गलत साबित करते हैं, जिसमें वे जबलपुर में सप्लाई हो रहे पानी को 100 प्रतिशत शुद्ध बताते हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि नगर निगम द्वारा जनता को गुमराह किया जा रहा है और वास्तविकता यह है कि कई इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो पीने के पानी को लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

महापौर ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस ने वास्तव में पानी के सैंपल लिए हैं, तो उनकी लैब टेस्टिंग रिपोर्ट भी उनके पास होनी चाहिए। यदि कांग्रेस के पास ऐसी कोई प्रमाणिक रिपोर्ट है तो उसे नगर निगम में जमा कराए। इसके बाद ही उस पर विचार किया जाएगा।

महापौर ने एक बार फिर दोहराया कि नगर निगम जबलपुर शहर को 100 प्रतिशत शुद्ध और सुरक्षित पीने का पानी सप्लाई कर रहा है और पानी की गुणवत्ता को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

पानी को लेकर बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
इंदौर दूषित पानी कांड के बाद जबलपुर में यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस और नगर निगम प्रशासन के बीच बढ़ती बयानबाजी से साफ है कि आने वाले दिनों में पीने के पानी को लेकर सियासत और गरमा सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस अपने दावों के समर्थन में क्या आधिकारिक रिपोर्ट पेश करती है और नगर निगम इस पर क्या कदम उठाता है।

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