मध्यप्रदेश जल निगम के वरिष्ठ प्रबंधक श्री मनोज श्रीवास्तव 31 जुलाई को अपने प्रशासनिक जीवन की एक गौरवपूर्ण यात्रा को पूर्ण करते हुए सेवा निवृत्त हो गए। श्री श्रीवास्तव न केवल एक कुशल अभियंता बल्कि एक दूरदर्शी योजनाकार भी रहे हैं, जिन्होंने अपने चार दशकों से अधिक के सेवाकाल में प्रदेश की अनेक महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी विदाई केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक युग का समापन मानी जा रही है, जिसने राज्य की जल संरचनात्मक योजनाओं को नई दिशा और पहचान दी। श्री श्रीवास्तव ने जल निगम में रहते हुए जिन परियोजनाओं को ज़मीन पर उतारा, उन्होंने न केवल तकनीकी दृष्टि से मिसाल कायम की बल्कि हजारों ग्रामीणों को स्वच्छ जल की सुविधा से भी जोड़ने का कार्य किया।
सागर की मड़िया और मालथोन जल प्रदाय योजनाओं में अग्रणी भूमिका
श्री श्रीवास्तव की प्रमुख उपलब्धियों में सागर जिले की बहुप्रतीक्षित मड़िया जल प्रदाय योजना और मालथोन समूह जल प्रदाय योजना का सफल क्रियान्वयन शामिल है। इन दोनों परियोजनाओं के लिए वे प्रारंभिक सर्वेक्षण से लेकर निर्माण, क्रियान्वयन और संचालन तक हर स्तर पर सक्रिय रूप से जुड़े रहे। तकनीकी पेचीदगियों और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने योजनाओं को तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराया।
बक्सवाहा योजना के संचालन में सराहनीय कार्य
सागर जिले की बक्सवाहा क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना, जो पूर्व में संचालित थी, उसके संचालन और संधारण को सुचारू रूप से बनाए रखने में श्री श्रीवास्तव की प्रशासनिक समझ और मैदानी अनुभव का बड़ा योगदान रहा। जल आपूर्ति की सततता, पाइपलाइन में लीकेज नियंत्रण, ऊर्जा उपयोग की दक्षता जैसे मुद्दों पर उनके नेतृत्व में ठोस कार्य किए गए।
ग्वालियर, मंडला और सिंहस्थ जैसे आयोजनों में प्रभावी नेतृत्व
श्री श्रीवास्तव की कार्यक्षमता केवल एक जिले या परियोजना तक सीमित नहीं रही। ग्वालियर, मंडला, सागर सहित अनेक जिलों में पदस्थ रहते हुए उन्होंने विभागीय कार्यों में नवाचार और प्रशासनिक दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विशेष रूप से सिंहस्थ 2004 एवं 2016 जैसे विश्वस्तरीय आयोजनों में जल आपूर्ति, सीवरेज प्रबंधन और अस्थायी ढांचों की स्थापना जैसे दायित्वों का सफल निर्वहन किया।
उनकी इसी बहुआयामी सेवाओं के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री विशिष्ट सेवा पुरस्कार पदक से सम्मानित किया गया था, जो उनके अनुकरणीय कार्यों की आधिकारिक मान्यता है।
सम्मान समारोह में गरिमामय विदाई
31 जुलाई को भोपाल स्थित जल निगम मुख्यालय में आयोजित एक गरिमामय समारोह में श्री श्रीवास्तव को औपचारिक रूप से सेवा निवृत्त किया गया। इस अवसर पर निगम के प्रबंध संचालक श्री के.वी.एस. चौधरी ने उन्हें शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और भावभीनी शुभकामनाएं दीं।
श्री चौधरी ने कहा, “मनोज श्रीवास्तव जैसे अधिकारी संस्था की रीढ़ होते हैं। उनकी प्रतिबद्धता, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दृष्टिकोण ने कई परियोजनाओं को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाई है। वे एक प्रेरणा हैं, खासकर युवा अभियंताओं के लिए।”
समारोह में जल निगम के सभी मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी स्टाफ एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विदाई समारोह के दौरान उनके सहयोगियों ने भावुकता भरे शब्दों में उनके साथ बिताए अनुभव साझा किए। एक अधिकारी ने कहा, “श्री श्रीवास्तव ने हमें न केवल कार्य सिखाया बल्कि नैतिक मूल्यों और ज़मीनी हकीकतों के साथ कैसे काम करना है, यह भी सिखाया।”
सेवानिवृत्ति पर श्री श्रीवास्तव का वक्तव्य
इस अवसर पर श्री श्रीवास्तव ने भी अपने उद्बोधन में जल निगम और अपने सहकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह यात्रा केवल मेरी नहीं, हम सबकी रही है। टीम वर्क और संकल्पशक्ति से ही बड़ी योजनाएं साकार होती हैं। मैं सौभाग्यशाली रहा कि मुझे ऐसे साथियों का सहयोग मिला, जिन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदला।”
उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि जल निगम आने वाले वर्षों में और अधिक जनहितैषी योजनाओं के साथ अपनी भूमिका को सशक्त करेगा।
श्री मनोज श्रीवास्तव की सेवा निवृत्ति के साथ मध्यप्रदेश जल निगम एक ऐसे अधिकारी को विदाई दे रहा है, जिन्होंने अपने काम से एक मिसाल कायम की। तकनीकी दक्षता, प्रशासनिक सूझबूझ और सामाजिक सरोकार को साथ लेकर कार्य करने वाले श्री श्रीवास्तव जैसे अधिकारी निश्चित ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे।
उनकी विदाई एक युग का अंत है, लेकिन उनके कार्यों की छाप जल निगम की हर योजना, हर पाइपलाइन और हर बूँद पानी में बनी रहेगी।