सागर जिले के आदर्श ग्राम पथरिया जाट में जल संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, विकासखंड सागर के मार्गदर्शन में नवांकुर संस्था विद्या विजय एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत साप्ताहिक संस्कार केंद्र में ‘जल संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों और ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों, ग्रामीणों और संस्था के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान वक्ताओं ने जल के महत्व, उसके संरक्षण की आवश्यकता और भविष्य में जल संकट की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि आज जल को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के समन्वयक गौरव सिंह राजपूत ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके बिना किसी भी प्रकार का जीवन संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण की शुरुआत हमें अपने घर से करनी चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास जैसे नल खुला न छोड़ना, जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करना और पानी को व्यर्थ बहने से रोकना, बड़े बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने बच्चों को वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को संग्रहित करके हम भूजल स्तर को बढ़ा सकते हैं और भविष्य में जल की कमी से बच सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने गांव के पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं, बावड़ी, नदी और झरनों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में परामर्शदाता संदीप रैकवार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई और सभी से अपील की कि वे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
संदीप रैकवार ने यह भी बताया कि यदि समाज के सभी लोग मिलकर जल संरक्षण के लिए काम करें, तो आने वाले समय में जल संकट को काफी हद तक टाला जा सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जल बचाने के लिए जागरूक करें।
कार्यक्रम का संचालन रविशंकर रजक द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित किया। कार्यक्रम में आदेश जैन, नरेश विश्वकर्मा, कविता ठाकुर, नरेश रजक, सत्यम चंदेल, जीवन रजक सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी और ग्रामवासी भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर जल संरक्षण के इस संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
यह जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक निरंतर चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान के तहत स्कूलों, गांवों और सामुदायिक स्थलों पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जल स्रोतों के अंधाधुंध दोहन के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पथरिया जाट में आयोजित यह ‘जल संवाद’ कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए शिक्षाप्रद रहा, बल्कि यह पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। इससे यह संदेश गया कि यदि समाज के सभी लोग मिलकर प्रयास करें, तो जल संरक्षण एक जन आंदोलन बन सकता है।
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम जल के महत्व को समझाने और उसे बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। आने वाले दिनों में इस तरह की पहलें जल संकट से निपटने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।