संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय, भोपाल के निर्देशानुसार आज विश्व धरोहर सप्ताह 2025 के अवसर पर जिला पुरातत्व संग्रहालय (पुरानी लेडी डफरिन हॉस्पिटल परिसर) में हमारी विरासत पर आधारित हेरीटेज वॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में स्थानीय ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व व्यक्त करना था।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि श्री रजनीश जैन (प्राचार्य, जैन पब्लिक स्कूल) ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर और छात्र-छात्राओं को हरी-झंडी दिखाकर किया। जैन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सहभागिता में हेरीटेज वॉक की शुरुआत जिला संग्रहालय से हुई और नगर के मुख्य मार्गों से होकर पुनः संग्रहालय पर समाप्त हुई।
हेरीटेज वॉक के बाद सभी प्रतिभागियों को संग्रहालय में विशेष रूप से भ्रमण कराकर पुरातत्व के महत्व, ऐतिहासिक स्मारकों की पहचान तथा उनकी देखभाल-रखरखाव के तरीके समझाए गए। बच्चों को म्यूज़ियम में प्रदर्शित पत्थर की नाव भी दिखायी गई और उसके निर्माण, उपयोग तथा सांस्कृतिक प्रासंगिकता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई, जिसने विद्यार्थियों में गहरी रुचि उत्पन्न की।

यह कार्यक्रम जिला पुरातत्व संग्रहालय के पुरातत्ववेत्ता श्री पी. सी. महोबिया के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। संग्रहालय के मार्गदर्शक श्री सुजीतपुरी गोस्वामी, सहायक ग्रेड-3 श्री विजय सिंह मीना तथा संग्रहालय का समस्त स्टाफ भी कार्यक्रम में सक्रिय रहे। जैन पब्लिक स्कूल की शिक्षिका-शिक्षकों ने छात्रों के साथ मिलकर मार्गदर्शन व अनुशासन बनाए रखा।
जिला पुरातत्व संग्रहालय के अधिकारियों ने उल्लेख किया कि ऐसे शैक्षिक कार्यक्रम बच्चों में स्थानीय इतिहास और धरोहरों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को मजबूत करते हैं। श्री पी. सी. महोबिया ने कहा — “हमारी छोटी-छोटी पहलें भविष्य की पीढ़ियों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक व संवेदनशील बनाएँगी। संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का घर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक स्मरण का स्रोत है।”
समाप्ति पर सभी छात्रों, शिक्षकों और सहयोगियों का धन्यवाद किया गया तथा आने वाले दिनों में और अधिक स्कूली कार्यक्रमों व कार्यशालाओं के आयोजन का आश्वासन दिया गया। आयोजन ने स्थानीय स्तर पर धरोहर संरक्षण के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रसारित किया और युवा वर्ग में इतिहास के प्रति उत्सुकता पैदा की।