सागर।
“भारत हमारी माता है, हम सभी एक माता के सपूत हैं, इसलिए हम सब एक हैं।” यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में युवाओं से जुड़ने और मिलकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में सहभागी बनने का संदेश देता है। यह उद्गार संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में स्टेडियम में आयोजित जिला युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए सह प्रांत प्रचार प्रमुख शिवनारायण पटेल ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भारत माता पर इतिहास में अनेक आक्रांताओं ने हमले किए, लेकिन कोई भी शक्ति हमारे अस्तित्व और संस्कृति को समाप्त नहीं कर सकी। इसका कारण हमारी सुदृढ़ और जीवन्त संस्कृति है, जिसने हर चुनौती का सामना किया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करें।
पंच परिवर्तन से ही सुधार संभव
शिवनारायण पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में पंच परिवर्तन की आवश्यकता है। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से आई विकृतियों का समाधान इन्हीं विषयों के माध्यम से संभव है। उन्होंने स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधिनी, सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी, और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को प्रमुख बताया। युवाओं से अपील की गई कि वे रसोईघर और स्नानघर की आवश्यक वस्तुएं स्वदेशी अपनाएं और दैनिक जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार करें।

जेन-ज़ेड को राष्ट्रवाद से जोड़ने पर जोर
उन्होंने कहा कि जेन-ज़ेड पीढ़ी को राष्ट्रवाद से परिचित कराना आज की बड़ी आवश्यकता है, ताकि अबोध युवा राष्ट्र विरोधी ताकतों के बहकावे में न आएं। युवाओं को विचारशील, जागरूक और समाज के प्रति उत्तरदायी बनने का संदेश दिया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और सहभागिता
सम्मेलन की शुरुआत भारत माता के पूजन-अर्चन से हुई। सरस्वती शिशु मंदिर की बहनों ने वंदेमातरम् की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।
कार्यक्रम में जिला संघ चालक डॉ. उमेश वैद्य, जिला कार्यवाह कमलेश अवस्थी, जिला सह कार्यवाह पवन, जिला प्रचारक शिवम, नगर कार्यवाह विशाल, भाजपा नेता अभिषेक भार्गव, नगर पालिका अध्यक्ष देवराज सोनी, मनोज तिवारी, डॉ. मनोज जैन, विकास चौरसिया, पार्षद अमित नायक, भाजपा मंडल अध्यक्ष महेश यादव, सूरज प्रजापति सहित देवरी, गढ़ाकोटा, गौरझामर और केसली से आए बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें युवाओं ने सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लिया।