बीना। शहर के बहुप्रतीक्षित झांसी गेट रेलवे ओवरब्रिज की जर्जर सड़क से जूझ रहे नागरिकों को आखिरकार राहत मिलनी शुरू हो गई है। प्रशासनिक पहल के बाद एसडीएम और रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी में निजी एजेंसी की मदद से ब्रिज के ऊपरी हिस्से पर डामरीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अब तक लगभग 300 मीटर हिस्से में काम पूरा हो चुका है, जिससे आवागमन सुगम हो गया है।
900 मीटर लंबे ब्रिज में आई थी गुणवत्ता समस्या
करीब तीन वर्ष पूर्व बने लगभग 900 मीटर लंबे इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण दो एजेंसियों द्वारा किया गया था। सिविल हिस्से का निर्माण पीडब्ल्यूडी ब्रिज ग्वालियर ने किया था, जबकि रेलवे ने अपने हिस्से का कार्य कराया था।
ब्रिज के शुरू होने के कुछ समय बाद ही ऊपरी स्लैब उखड़ने लगे थे। सड़क की सतह खराब होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को झटकों और दुर्घटना की आशंका का सामना करना पड़ रहा था।
मरम्मत को लेकर एजेंसियों में असमंजस

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार ब्रिज की मरम्मत की मांग उठाई। गारंटी अवधि के दौरान पीडब्ल्यूडी ने अपने हिस्से की मरम्मत करवा दी थी, लेकिन रेलवे और नगर पालिका के बीच हैंडओवर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से रेलवे पोर्शन का काम लंबित रहा।
रेलवे का कहना था कि मरम्मत का दायित्व नगर पालिका का है, जबकि नगर पालिका का तर्क था कि ब्रिज का औपचारिक हैंडओवर नहीं हुआ है। इस प्रशासनिक असमंजस के चलते करीब एक वर्ष तक मरम्मत कार्य अटका रहा।
पार्षद ने किया था विरोध
नानक वार्ड के पार्षद सहित स्थानीय लोगों ने कई बार विरोध प्रदर्शन कर ब्रिज की हालत सुधारने की मांग की थी। खराब सड़क के कारण रोजाना हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
अब मिली राहत
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद कार्य शुरू होने से लोगों में संतोष है। अधिकारियों का कहना है कि शेष हिस्से में भी शीघ्र डामरीकरण कराया जाएगा, ताकि पूरे ब्रिज पर आवागमन सुरक्षित और सुचारु हो सके।
स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि इस बार गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, जिससे भविष्य में दोबारा ऐसी समस्या न उत्पन्न हो।