टीकमगढ़।
जिले में संविदा कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर बाद से ही सैकड़ों कर्मचारी कलेक्टर कार्यालय परिसर में जमा हो गए। हाथों में बैनर-पोस्टर और गले में नारों की गूंज—
“अभी करो, अर्जेंट करो… हमको परमानेंट करो”
—के साथ कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।
सरकार के आश्वासनों पर जताया रोष
संविदा कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के जिला संयोजक जीवन शर्मा ने कहा कि पिछले ढाई दशक से संविदा कर्मचारी असुरक्षा और अनिश्चितता की जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन संविदा कर्मचारियों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने विशेष तौर पर 4 जुलाई 2023 को मुख्यमंत्री द्वारा पंचायतों में संविदा कर्मियों को लेकर की गई घोषणाओं का हवाला देते हुए कहा कि इन घोषणाओं के बाद जारी संविदा नीति 2023 में कई अहम बिंदु गायब कर दिए गए।
शर्मा ने बताया कि नीति में यह प्रावधान होना चाहिए था कि “हर साल अनुबंध की प्रक्रिया समाप्त होगी”, लेकिन इसे शामिल ही नहीं किया गया। इसके अलावा, संविदा कर्मियों की 25 साल तक की वरिष्ठता (सीनियरिटी) भी खत्म कर दी गई।

विसंगतियों पर उठाए सवाल
संविदा नेताओं का आरोप है कि इस नीति में कर्मचारियों को न तो नियमित कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता मिला, न ही समान अवकाश, और न ही चिकित्सा सुविधा।
उन्होंने कहा कि तीन साल बीत जाने के बावजूद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ई-गवर्नेंस, सामाजिक न्याय, विकलांग पुनर्वास केंद्र और कृषि विभाग (आत्मा प्रोजेक्ट) जैसे विभागों में संविदा नीति अब तक लागू ही नहीं हो पाई है।
जहां यह नीति लागू हुई है, वहां भी विभागीय स्तर पर भारी विसंगतियां हैं। यही कारण है कि कर्मचारियों को मजबूर होकर फिर से सड़कों पर उतरना पड़ा है।
मुख्य मांगें
प्रदर्शन के दौरान संविदा कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और अपनी प्रमुख मांगें रखीं :
- जिन विभागों में संविदा नीति लागू नहीं हुई, वहां एक साथ तारीख तय कर लागू की जाए।
- मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, 65 वर्ष की अधिकतम आयु तक सीधा एक अनुबंध किया जाए।
- नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता, अवकाश और चिकित्सा सुविधा दी जाए।
- भर्ती प्रक्रिया में 50% पद वरिष्ठता के आधार पर सीधे भरे जाएं।
- 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शुरू किया जाए।
जीवन शर्मा का कहना था कि –
“ये मांगें अव्यावहारिक नहीं हैं, बल्कि न्यूनतम अधिकार हैं जो किसी भी कर्मचारी को उसके काम के बदले मिलने चाहिए।”
जिला प्रशासन के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा और जिला मुख्यालय से लेकर भोपाल तक प्रदर्शन होंगे।

गांव-गांव तक गूंजा आंदोलन
सोमवार के इस प्रदर्शन में जिले के विभिन्न विभागों से जुड़े कर्मचारी शामिल हुए। स्वास्थ्य, पंचायत, शिक्षा, कृषि और आईटी प्रोजेक्ट्स से जुड़े संविदा कर्मियों की उपस्थिति बड़ी संख्या में देखने को मिली।
यह आंदोलन जिलेभर में चर्चा का विषय बना रहा। आमजन भी यह कहते नजर आए कि इतने सालों से काम करने के बावजूद संविदा कर्मियों को स्थायित्व और बराबरी के अधिकार क्यों नहीं दिए जाते।