टीकमगढ़।
जिले में राजनीतिक सरगर्मी उस समय तेज हो गई जब अचानक सड़क पर बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड मिलने का मामला सामने आया। यह घटना केंद्रीय मंत्री के बंगले के पास की बताई जा रही है। प्रकरण को लेकर सांसद प्रतिनिधि विवेक चतुर्वेदी ने गंभीर सवाल उठाए हैं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सांसद प्रतिनिधि की शिकायत
विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि सड़क पर फेंके गए वोटर आईडी कार्ड न सिर्फ निर्वाचन प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि यह किसी साजिश की ओर भी इशारा करते हैं।
उन्होंने कहा –
“जानबूझकर केंद्रीय मंत्री की छवि को धूमिल करने के लिए यह कार्ड उनके बंगले के बगल में फेंके गए हैं। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हमने इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर ली है।”
साथ ही उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि इन वोटर आईडी कार्ड के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में दिए गए लाभों की जांच कराई जाए।

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
सांसद प्रतिनिधि की शिकायत के बाद कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए। कलेक्टर ने निर्वाचन शाखा और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे कार्ड की सत्यता और उनकी पृष्ठभूमि की जांच करें।
तहसीलदार का बयान
बड़ागांव तहसीलदार सत्येंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि –
“सड़क पर मिले सभी वोटर आईडी कार्ड टीकमगढ़ जिले के ही लोगों के हैं। रात में ही इन्हें निर्वाचन शाखा को सत्यापन के लिए सौंप दिया गया है। कार्ड किसने और क्यों फेंके, यह पुलिस जांच का विषय है।”
उन्होंने आश्वस्त किया कि मामले की गहनता से जांच होगी और दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जिले में बढ़ी चर्चाएं
यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी संख्या में वोटर आईडी कार्ड सड़क पर कैसे और क्यों फेंके गए? क्या इसके पीछे कोई सियासी साजिश है या फिर यह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा?
फिलहाल, प्रशासन और पुलिस दोनों मिलकर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।