तीन दिवसीय राष्ट्रीय लोक रंग महोत्सव का भव्य समापन, लोक संस्कृति की विविध छटाओं ने मोहा मन !

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सागर। बुंदेली लोक नृत्य व नाट्य कला परिषद, कनेरा देव सागर द्वारा आयोजित तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संपन्न हुए तीन दिवसीय राष्ट्रीय लोक रंग महोत्सव का भव्य और रंगारंग समापन हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 200 लोक कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक लोक नृत्य, लोक नाट्य एवं लोक रंग प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस राष्ट्रीय लोक महोत्सव का आयोजन दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर, संस्कृति विभाग गुजरात, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज, जनजातीय बोली विकास अकादमी तथा संस्कृत परिषद, मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से किया गया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में देश की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला।

महोत्सव के अंतिम दिवस पर गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश से आए लोक कलाकारों ने अपनी विशिष्ट और पारंपरिक प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत कर दिया। कहीं गरबा और डांडिया की लय दिखी, तो कहीं महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की लोक नृत्य परंपराओं की ऊर्जा नजर आई। कर्नाटक और उत्तरप्रदेश की प्रस्तुतियों ने अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान के साथ दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया, वहीं मध्यप्रदेश की लोक कला ने अपनी मिट्टी की खुशबू बिखेरी।

प्रत्येक प्रस्तुति में संबंधित क्षेत्र की लोक परंपरा, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, वाद्य यंत्र और जीवन दर्शन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय और सधे हुए नृत्य के माध्यम से लोक संस्कृति की गहराई और उसकी सामाजिक महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

महोत्सव का समापन सभी कलाकारों की सामूहिक सहभागिता के साथ हुआ, जिसमें सांस्कृतिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और लोक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन लोक कलाओं को जीवित रखने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

राष्ट्रीय लोक रंग महोत्सव का यह आयोजन सागर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक यादगार अध्याय बन गया, जिसने दर्शकों को देश की विविध लोक संस्कृतियों से रूबरू कराते हुए भारतीय सांस्कृतिक एकता की मजबूत झलक प्रस्तुत की।

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