मध्यप्रदेश के सागर में इस बार नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ एक सराहनीय पहल देखने को मिली है। जहां हर साल निजी स्कूलों पर महंगी किताबें खरीदवाने के आरोप लगते हैं, वहीं इस बार शहर और मकरोनिया क्षेत्र के तीन स्कूलों ने “बुक एक्सचेंज प्रोग्राम” शुरू कर एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।
इस पहल का उद्देश्य न केवल अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करना है, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण भी है। स्कूलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी पुरानी किताबें स्कूल में जमा करें, ताकि जरूरतमंद छात्रों को वे किताबें उपलब्ध कराई जा सकें।
इस पहल में प्रमुख रूप से सुंदरलाल श्रीवास्तव मेमोरियल हायर सेकंडरी स्कूल, दीपक मेमोरियल एकेडमी और ब्लू बेल्स फाउंडेशन स्कूल शामिल रहे। इन स्कूलों ने रिजल्ट घोषित होते ही अभिभावकों को संदेश भेजकर किताबें जमा करने और आपस में एक्सचेंज करने की अपील की।
स्कूल प्रबंधन ने यह व्यवस्था भी दी कि अभिभावक स्कूल आकर अपने बच्चों के लिए पुरानी किताबें चुन सकते हैं या फिर आपस में संपर्क करके किताबों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इस प्रयास का बड़ा असर देखने को मिला—करीब 1000 विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिला।

डॉ. अजय श्रीवास्तव, जो सुंदरलाल श्रीवास्तव स्कूल के संचालक हैं, ने बताया कि यह विचार अभिभावकों की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए आया। कई अभिभावक किताबों के खर्च को लेकर चिंता जताते थे, जिससे प्रेरित होकर यह कदम उठाया गया।
इसी तरह डॉ. रितु जायसवाल, प्राचार्या दीपक मेमोरियल एकेडमी, ने बताया कि सत्र शुरू होने से पहले ही विद्यार्थियों को मैसेज भेज दिए गए थे ताकि वे किताबें डोनेट करें और जरूरत हो तो दूसरों से ले भी सकें। इस स्कूल में ही 700 से अधिक छात्रों ने इस योजना का लाभ उठाया।
वहीं सुजाता मलैया, प्राचार्या ब्लू बेल्स फाउंडेशन स्कूल, ने बताया कि चूंकि इस बार कोर्स में कोई बदलाव नहीं हुआ था, इसलिए यह पहल और भी आसान हो गई। जिन विद्यार्थियों ने किताबें जमा कीं, उन्हें जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचाया गया।
इस पहल से अभिभावकों को सीधा आर्थिक लाभ भी मिला है। नर्सरी से लेकर 12वीं तक किताबों का खर्च 500 से 2000 रुपये तक होता है, जो कॉपियों के साथ और बढ़ जाता है। एक अभिभावक प्रवीण सिंह के अनुसार, उन्होंने अपने बच्चे की पुरानी किताबें दान कीं और बदले में नई कक्षा की किताबें प्राप्त कर करीब 600 रुपये की बचत की।
इस सराहनीय प्रयास को और व्यापक बनाने के लिए पालक महासंघ भी आगे आया है। महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धरणेंद्र जैन ने कहा कि सभी स्कूलों में “बुक बैंक” योजना शुरू की जानी चाहिए। इससे न केवल पैसे की बचत होगी, बल्कि कागज की खपत भी कम होगी, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि जल्द ही सभी निजी स्कूलों को बुक बैंक स्थापित करने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही अभिभावकों और विद्यार्थियों को भी इसके लिए जागरूक किया जाएगा।
कुल मिलाकर, सागर के इन स्कूलों की यह पहल न सिर्फ आर्थिक रूप से राहत देने वाली है, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। यह अन्य स्कूलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है, जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक समावेशी और किफायती बन सके।