दतिया। जिले में वर्ष 2025 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। भर्ती में उत्तर प्रदेश की फर्जी अंकसूचियों का उपयोग किया गया, जो जांच में प्रमाणित हुईं। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित भर्तियों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
शिकायतों पर गंभीर कार्रवाई
भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े के निर्देश पर जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति को सात दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
जांच समिति में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्रभारी अधिकारी बनाया गया, जबकि संयुक्त कलेक्टर, सहायक संचालक शिक्षा विभाग और साइबर क्राइम अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहे।
फर्जी संस्था की अंकसूचियां मिलीं उपयोग में
जांच के दौरान यह पाया गया कि भर्ती में जिन अंकसूचियों का उपयोग हुआ, वे “महर्षि वाल्मीकि संस्कृत एवं योग शिक्षा संस्थान, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)” के नाम से जारी की गई थीं। समिति ने जब संस्था की मान्यता की पुष्टि की तो यह किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से पंजीकृत नहीं पाई गई।
पते पर कोई संस्था नहीं मिली

समिति ने संस्था द्वारा बताए गए पते पर जाकर निरीक्षण किया। वहां कोई शिक्षण संस्था संचालित नहीं थी और स्थानीय लोगों ने भी ऐसे किसी संस्थान के अस्तित्व से स्पष्ट इनकार किया।
तकनीकी जांच में गंभीर गड़बड़ियां
अंकसूचियों की तकनीकी जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं:
- एक ही प्रमाण पत्र क्रमांक से अलग-अलग वर्षों की अंकसूचियां मिलीं।
- अंकसूचियों में दर्ज “पायनियर डिस्टेंस लर्निंग सेंटर, जौनपुर” के पंजीकरण से जुड़े कोई प्रमाण नहीं मिले।
- अलग-अलग दस्तावेजों में स्टडी सेंटर के पंजीकरण क्रमांक अलग पाए गए।
- संस्था की वेबसाइट पर दर्ज संपर्क नंबर दतिया निवासी युवक का पाया गया, जिसने संस्था से संबंध होने से इनकार किया।
प्रशासन का फैसला
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने संबंधित भर्तियों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी जैसी संवेदनशील योजना में फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी व निष्पक्ष बनाया जाएगा।
जिले में मचा हड़कंप
इस खुलासे के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। ईमानदारी से चयन की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों में नाराजगी है, जबकि प्रशासन की कार्रवाई से लोगों को निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद भी जगी है
दतिया। दतिया जिले में वर्ष 2025 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। भर्ती में उपयोग की गई उत्तर प्रदेश की कुछ अंकसूचियां जांच में फर्जी पाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित भर्तियों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
शिकायतों के बाद गठित हुई जांच समिति
आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े के निर्देश पर जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति को सात दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
जांच समिति में जिला पंचायत दतिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्रभारी अधिकारी बनाया गया था। समिति में संयुक्त कलेक्टर, सहायक संचालक शिक्षा विभाग तथा साइबर क्राइम से जुड़े अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश की संस्था की अंकसूचियां निकलीं फर्जी
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भर्ती में जिन अंकसूचियों का उपयोग किया गया, वे महर्षि वाल्मीकि संस्कृत एवं योग शिक्षा संस्थान, उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के नाम से जारी की गई थीं। जब जांच समिति ने उक्त संस्था की मान्यता और पंजीयन की जांच की तो पाया गया कि यह संस्था माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश अथवा किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड में पंजीकृत नहीं है।
बताए गए पते पर संस्था नहीं मिली
जांच समिति द्वारा संस्था के बताए गए पते पर स्थल निरीक्षण भी किया गया, लेकिन वहां किसी भी प्रकार की शैक्षणिक संस्था या शिक्षण गतिविधि संचालित नहीं पाई गई। स्थानीय लोगों ने भी ऐसी किसी संस्था के अस्तित्व से स्पष्ट इनकार किया।
तकनीकी जांच में उजागर हुईं गंभीर खामियां
अंकसूचियों की तकनीकी जांच में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं।
- एक ही प्रमाण पत्र क्रमांक से अलग-अलग वर्षों की अंकसूचियां पाई गईं।
- अंकसूचियों में दर्शाए गए “पायनियर डिस्टेंस लर्निंग सेंटर, जौनपुर” के पंजीयन से जुड़ा कोई प्रमाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।
- अलग-अलग दस्तावेजों में स्टडी सेंटर के पंजीयन क्रमांक भी अलग-अलग पाए गए।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि संस्था की वेबसाइट पर दर्ज संपर्क नंबर दतिया निवासी एक युवक का है। संबंधित युवक ने पूछताछ में संस्था से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार किया है।
भर्तियां होंगी निरस्त, दोषियों पर सख्त कार्रवाई
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने संबंधित आंगनबाड़ी भर्तियों को निरस्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्ट कहा है कि आंगनबाड़ी जैसी संवेदनशील और सामाजिक महत्व की योजना में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सख्त बनाया जाएगा।
जिले में मचा हड़कंप
इस खुलासे के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। ईमानदारी से चयन की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों में जहां नाराजगी है, वहीं प्रशासन की सख्ती से लोगों को निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद भी जगी है।