दमोह के कुम्हारी गांव में ‘विवाह क्रिकेट टूर्नामेंट’: खेल और समाज सेवा का अनोखा संगम !

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दमोह। मध्यप्रदेश के दमोह जिले के कुम्हारी गांव में एक ऐसा क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है, जो सिर्फ रन और विकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब और अनाथ बेटियों के जीवन की नई शुरुआत लिख रहा है। इसे ‘विवाह क्रिकेट टूर्नामेंट’ कहा जा रहा है, जहां फाइनल मैच में दो बेटियों की समाज के सहयोग से शादी कराई जाएगी।


खेल से समाज सेवा तक का सफर

इस अनोखी पहल के पीछे हैं कुम्हारी गांव निवासी रवि चौहान, जो बताते हैं– “मेरी पहली संतान बेटी है और मैंने दूसरी भी बेटी ही चाही। बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता, इसी सोच से हर साल एक जरूरतमंद बेटी की शादी कराने का संकल्प लिया।”

रवि की यह सोच अब पूरे गांव और आसपास के समाज को जोड़ रही है। परिवार, मित्र और समाजसेवी इस मुहिम में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं

  • टूर्नामेंट की शुरुआत 20 दिसंबर से हुई।
  • इसमें 24 टीमें भाग ले रही हैं।
  • विजेता को इनाम: 41 हजार रुपए, उपविजेता को: 11,100 रुपए
  • असली इनाम: बेटियों की शादी के लिए जुटाई गई राशि।

पिछले सीजन में दो बेटियों को मिला नया जीवन

  • 2023: पहले सीजन में कुम्हारी गांव की बेटी रानी आदिवासी की शादी फाइनल मैच के दौरान करवाई गई। दहेज की जगह समाजसेवियों ने गृहस्थी का जरूरी सामान भेंट किया।
  • 2024: दूसरे सीजन में बबीता आदिवासी का विवाह संजय नगर गैसाबाद निवासी युवक से संपन्न हुआ। इस आयोजन को समाज का जबरदस्त समर्थन मिला।

इस साल दो बेटियों की नई शुरुआत

रवि चौहान ने बताया कि 2025 में दो जरूरतमंद बेटियों की शादी की तैयारी चल रही है।

  • एक बेटी दलित परिवार से है।
  • दूसरी बेटी आदिवासी परिवार की है।
  • विवाह का पूरा खर्च टूर्नामेंट से जुटी राशि और समाजसेवियों के सहयोग से किया जाएगा।

शादी की प्रक्रिया और आयोजन

टूर्नामेंट के आयोजक बताते हैं कि विवाह के लिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को चुना जाता है।

  1. टीम के सदस्य परिवार का दौरा कर उनकी स्थिति का आंकलन करते हैं।
  2. फाइनल मैच के दिन ग्राउंड पर जयमाला और रस्में आयोजित की जाती हैं।
  3. घर का जरूरी सामान पुरस्कार के रूप में दिया जाता है, ताकि दहेज जैसी परंपरा को खत्म किया जा सके।

खेल के साथ समाज में बदलाव

कुम्हारी गांव का यह टूर्नामेंट यह संदेश देता है कि क्रिकेट सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज बदलने का जरिया भी बन सकता है। जहां आम तौर पर क्रिकेट में ट्रॉफी मिलती है, वहीं यहां बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और भविष्य मिल रहा है।

  • टूर्नामेंट में जिले भर की 16 टीमें भाग ले रही हैं।
  • मैच हर दूसरे दिन खेला जा रहा है।
  • 15 फरवरी 2026 को फाइनल मैच होगा और उसके बाद बेटियों की शादी कराई जाएगी।

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