दमोह के मानस भवन में चल रहे नाट्य समारोह के चौथे दिन रविवार रात भोपाल की स्ट्रीट फैक्ट कल्चरर एंड वेलफेयर सोसायटी के कलाकारों ने ‘लछिया’ नाटक का मंचन किया। यह प्रस्तुति हिंदी और बुंदेली भाषा में दी गई, जिसे स्थानीय युवा नाट्य मंच द्वारा आयोजित किया गया। नाटक ने सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से मंच पर उतारते हुए दर्शकों को भावुक कर दिया।
समाज की विसंगतियों पर केंद्रित कथानक
‘लछिया’ नाटक समाज में जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर फैली असमानताओं और विसंगतियों को उजागर करता है। इसके माध्यम से यह दिखाया गया कि किस प्रकार सामाजिक ढांचे में बंधा व्यक्ति अपनी असली पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष करता है। नाटक मानवीय व्यवहार की उन बारीक परतों को सामने लाता है, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
पहचान की तलाश में भोला उर्फ लछिया

कहानी का मुख्य पात्र भोला उर्फ लछिया है, जो न तो पूरी तरह पुरुष है और न ही महिला। समाज उसे स्वीकार नहीं करता, न ही उसे प्रेम और सम्मान देता है। इसके बावजूद वह समाज द्वारा बनाए गए नियमों और परंपराओं के बीच जीने को मजबूर है।
अपनी भावनात्मक अकेलेपन से जूझते हुए लछिया एक दिन अपने ही बनाए मिट्टी के पुतले से प्रेम करने लगता है। यह प्रतीकात्मक प्रेम उसकी मानसिक स्थिति और पहचान के संघर्ष को दर्शाता है। अंततः वह अपनी पहचान बदलने का निर्णय लेता है। नाटक दर्शकों के सामने यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हमारी सामाजिक मान्यताएं ईश्वर की देन हैं या मनुष्य द्वारा बनाई गई सीमाएं।
दर्शकों ने सराहा मंचन

कलाकारों की सशक्त अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और मंच सज्जा ने दर्शकों को बांधे रखा। कई दृश्यों में भावनात्मक संवादों ने सभागार को शांत और चिंतनशील बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
‘लोकमाता अहिल्या’ से होगा समापन
नाट्य समारोह का समापन पांचवें दिन ‘लोकमाता अहिल्या’ नाटक की प्रस्तुति के साथ होगा। यह नाटक मालवा की महान शासक अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और उनके योगदान पर आधारित है। नाटक के लेखक डॉ. उमेश चौरसिया और निर्देशक वरिष्ठ रंगकर्मी राजीव अयाची हैं।

युवा नाट्य मंच द्वारा आयोजित यह समारोह शहर में रंगकर्म और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दे रहा है। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से अंतिम दिन की प्रस्तुति में शामिल होने की अपील की है।