मध्यप्रदेश में पहली बार की पीले तरबूज की खेती, कम पानी में बेहतर पैदावार, व्यापारियों की लगी लाइन
दमोह, मध्यप्रदेश — दमोह जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर अभाना गांव के प्रगतिशील युवा किसान आकाश और अक्षत सेठ ने एक ऐसा नवाचार किया है, जिसने न केवल उनके गांव बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। दोनों भाइयों ने मध्यप्रदेश में पहली बार पीले तरबूज की व्यावसायिक खेती कर बंपर सफलता हासिल की है।

तीन साल की मेहनत लाई रंग
बीकॉम उत्तीर्ण आकाश और अक्षत सेठ पिछले कई वर्षों से तरबूज और खरबूज की खेती कर रहे हैं। तीन साल पहले उन्होंने 5 क्यारी में पीले तरबूज का बीज लगाया और प्रयोगात्मक रूप से इसकी संभावनाएं तलाशी। शुरुआती समस्याओं को समझकर और उत्पादन विधियों को जानने के बाद, इस बार उन्होंने पूरे 1.25 एकड़ में इस विशेष वैरायटी की खेती की, जिससे उन्हें बंपर पैदावार मिली।
खास तकनीक और आधुनिक पद्धति का उपयोग
दोनों भाइयों ने बताया कि पीले तरबूज का बीज उन्हें 80,000 रुपये प्रति किलो की दर से कंपनी से मिला। इसे उन्होंने पहले नर्सरी में उगाया और फिर खेत में टपक सिंचाई पद्धति से लगाया। इससे कम पानी में भी फसल तैयार हुई। इस बार उन्होंने 40 से अधिक मधुमक्खी के बक्से भी रखवाए, जिससे परागण में मदद मिली और उत्पादन में 2 से 3 टन की बढ़ोतरी हुई।

60 दिन में तैयार हुई फसल
जहां आमतौर पर पीले तरबूज की फसल 90 दिन में तैयार होती है, वहीं इन किसानों ने पौध तैयार कर पहले ही खेत में रोपण कर दिया, जिससे फसल 60 दिन में तैयार हो गई। उन्होंने बताया कि पीला तरबूज, लाल तरबूज की तुलना में अधिक मीठा होता है और इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
व्यापारियों की बढ़ती मांग, दोगुना दाम
इस नवाचार की जानकारी जैसे ही फैली, जबलपुर, सतना और कटनी से व्यापारियों ने आकर थोक में 14–15 रुपये प्रति किलो के दाम पर पीला तरबूज खरीदा। यह लाल तरबूज से लगभग दोगुनी कीमत है, जो थोक में 7–8 रुपये किलो बिकता है।
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
कृषि विज्ञान केंद्र, दमोह के वैज्ञानिक डॉ. मनोज अहिरवार ने बताया कि पीले तरबूज में विटामिन-ए, बी, सी, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्व होते हैं। यह गर्मी में ऊर्जा देने वाला, वजन घटाने में सहायक और पेट की समस्याओं में राहत देने वाला फल है।

किसानों को नवाचार के लिए आमंत्रण
यदि आप भी ऐसे ही खेती में नवाचार कर रहे हैं और चाहते हैं कि आपकी कहानी दूसरे किसानों तक पहुंचे, तो आप अपनी जानकारी, फोटो और वीडियो 9713477602 पर व्हाट्सएप के माध्यम से भेज सकते हैं। ध्यान रहे, यह नवाचार किसी अन्य मीडिया में प्रकाशित न हुआ हो।
आकाश और अक्षत सेठ का यह प्रयोग साबित करता है कि नई सोच और आधुनिक तकनीक से ग्रामीण भारत के किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो सकते हैं और देश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
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