दमोह।
जिले के तेजगढ़ थाना क्षेत्र में रविवार को पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध अफीम की खेती का पर्दाफाश किया। मुखबिर की सटीक सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने करीब ढाई से तीन एकड़ भूमि पर लहलहा रही अफीम की फसल को जब्त कर लिया। यह खेती चने की फसल के बीच बेहद चालाकी से छिपाकर की जा रही थी। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है।

चने के खेत में छिपी थी करोड़ों की फसल
जानकारी के अनुसार, इमलिया चौकी प्रभारी अक्षयेंद्रनाथ को रविवार दोपहर सूचना मिली थी कि ग्राम मुराडी और सुहेला के लोकाम मौजा क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम उगाई जा रही है। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी ने तेजगढ़ थाना प्रभारी अरविंद सिंह लोधी को अवगत कराया और संयुक्त टीम बनाकर मौके पर दबिश दी गई।
जब पुलिस खेत पर पहुंची तो पहली नजर में चने की सामान्य फसल दिखाई दी, लेकिन गहन निरीक्षण में चने के बीच कतारों में खड़े अफीम के पौधे नजर आए। करीब तीन एकड़ क्षेत्र में अफीम की फसल पूरी तरह तैयार थी और कटाई के मुहाने पर थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह अवैध फसल बाजार में पहुंच सकती थी।
करोड़ों की कीमत आंकी जा रही
पुलिस ने सभी हरे-भरे अफीम के पौधों को उखाड़कर जब्त कर लिया है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस फसल की कीमत करोड़ों रुपए हो सकती है। हालांकि सटीक मूल्यांकन जप्ती की आधिकारिक प्रक्रिया और वजन के बाद ही स्पष्ट होगा।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि पौधों को विधिवत नष्ट करने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पंचनामा तैयार किया जा रहा है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि साक्ष्य मजबूत रह सकें।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने रामप्रसाद आदिवासी को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह अपने बड़े पिता भगत आदिवासी के साथ खेत में काम करता था। पुलिस को संदेह है कि इस अवैध खेती में अन्य लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है।
आरोपी के खिलाफ NDPS Act की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया जा रहा है। इस कानून के अंतर्गत अवैध रूप से अफीम की खेती करना गंभीर अपराध है, जिसमें कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
पुलिस की गहन जांच शुरू
थाना प्रभारी अरविंद सिंह लोधी ने बताया कि फिलहाल खेत से अफीम के पौधों को हटाने और उनका वजन करने की कार्रवाई जारी है। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार के तार कहां-कहां जुड़े हैं।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अफीम की खेती के लिए बीज कहां से उपलब्ध कराए गए और क्या यह किसी संगठित गिरोह का हिस्सा है। पुलिस आसपास के गांवों में भी सतर्कता बरत रही है और संभावित संदिग्ध स्थानों पर नजर रखी जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में हड़कंप
कार्रवाई की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर चर्चा है कि खुलेआम चने की आड़ में इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती की जा रही थी और किसी को भनक तक नहीं लगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती तो क्षेत्र की छवि पर दाग लग सकता था। उन्होंने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।

अवैध खेती पर सख्ती जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि मादक पदार्थों की अवैध खेती न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करती है। इससे युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा रहता है और अपराध को बढ़ावा मिलता है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। किसी भी सूचना को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
दमोह की इस कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि अवैध गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और इस अवैध नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं। फिलहाल पुलिस की सतर्कता से करोड़ों की अवैध अफीम बाजार में पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दी गई है।