दमोह, 07 सितंबर 2025: मध्य प्रदेश के दमोह में रविवार को पूर्णिमा के दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई। इस पवित्र अवसर पर सनातन धर्म के अनुयायी अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और जल तर्पण करने के लिए शहर के पुराना तालाब, बेलाताल, और फुटेरा तालाब पहुंचे। पंडितों ने विधि-विधान के साथ तर्पण की प्रक्रिया संपन्न कराई। यह धार्मिक कार्य 15 दिनों तक चलेगा और अमावस्या के दिन इसका समापन होगा।

पितृ पक्ष का महत्व
पितृ पक्ष सनातन धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक महत्वपूर्ण अवधि है, जो 15 दिनों तक चलती है। इस दौरान श्रद्धालु अपने पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण, पिंडदान, और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि इस समय पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवारजनों से किए गए तर्पण और श्राद्ध से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। पंडित राहुल पाठक ने बताया, “पितृ पक्ष सनातन धर्म में सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान जल तर्पण और श्राद्ध कर्म से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।”
जल तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान
पितृ पक्ष के पहले दिन दमोह के विभिन्न तालाबों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। लोग अपने परिवार के उन सदस्यों के लिए तर्पण करने पहुंचे, जिनका निधन हो चुका है। पंडितों ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ जल तर्पण कराया। कई श्रद्धालु अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि पर घरों में भोज का आयोजन करेंगे, जिसमें ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। इसके अलावा, कुछ लोग पितृ पक्ष के दौरान बिहार के गया जी जाकर पिंडदान और तर्पण करेंगे, जो सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

धार्मिक और सामाजिक माहौल
पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ दमोह में धार्मिक माहौल छाया रहा। तालाबों के किनारे श्रद्धालु सुबह जल्दी पहुंचे और पंडितों के मार्गदर्शन में तर्पण और पूजा-अर्चना की। स्थानीय निवासी रमेश शर्मा ने कहा, “यह हमारी परंपरा का हिस्सा है। हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।” कई परिवारों ने इस अवसर पर अपने घरों में भी पूजा-पाठ और हवन का आयोजन किया।
पंडितों की सलाह
पंडित राहुल पाठक ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, “इस दौरान शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, या नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। साथ ही, तर्पण और श्राद्ध कर्म पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन लोगों के माता-पिता का निधन हो चुका है, उनके लिए यह समय अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है।

गया जी की यात्रा
पितृ पक्ष के दौरान कई श्रद्धालु गया जी की यात्रा पर निकलते हैं, जहां पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गया में किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। दमोह के कुछ परिवारों ने इस वर्ष गया जी जाने की योजना बनाई है, ताकि वे अपने पूर्वजों के लिए विशेष अनुष्ठान कर सकें।
सामुदायिक एकता और परंपरा
पितृ पक्ष का आयोजन दमोह में सामुदायिक एकता और परंपराओं को मजबूत करने का एक अवसर बन गया है। तालाबों पर एकत्रित श्रद्धालुओं ने न केवल अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन किया, बल्कि सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ावा दिया। स्थानीय प्रशासन ने भी तालाबों के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रबंध किए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपने अनुष्ठान पूरे कर सकें।
निष्कर्ष
दमोह में पितृ पक्ष की शुरुआत ने एक बार फिर सनातन धर्म की गहरी परंपराओं और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा को उजागर किया। पुराना तालाब, बेलाताल, और फुटेरा तालाब पर जल तर्पण के साथ शुरू हुआ यह पवित्र समय अगले 15 दिनों तक चलेगा, जिसमें श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। यह अवसर न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक एकता को भी मजबूत करता है, जो सनातन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।