दमोह स्टेशन पर वेतन विवाद, सफाई व्यवस्था चरमराई !

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मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्थित दमोह रेलवे स्टेशन, जिसे “मॉडल रेलवे स्टेशन” का दर्जा प्राप्त है, इन दिनों गंभीर अव्यवस्था का सामना कर रहा है। स्टेशन परिसर, जो कभी अपनी साफ-सफाई और व्यवस्थित वातावरण के लिए जाना जाता था, अब कचरे के ढेर और गंदगी से पट गया है। इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण है सफाई कर्मचारियों की अचानक शुरू हुई हड़ताल, जिसने रेलवे प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह हड़ताल बुधवार से शुरू हुई, जब स्टेशन पर तैनात सभी निजी सफाई कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो गया है। इस मुद्दे को लेकर वे पहले भी कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान न मिलने के कारण उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया।

मॉडल स्टेशन की छवि को लगा झटका

दमोह रेलवे स्टेशन को “मॉडल स्टेशन” का दर्जा मिलने के बाद यहां साफ-सफाई, यात्रियों की सुविधा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। रेलवे द्वारा समय-समय पर स्टेशन के आधुनिकीकरण और स्वच्छता के लिए कई योजनाएं लागू की गई थीं। लेकिन वर्तमान में जो हालात बने हैं, वे इस छवि को पूरी तरह धूमिल कर रहे हैं।

स्टेशन परिसर में प्लेटफॉर्म, वेटिंग एरिया, टिकट काउंटर और यहां तक कि अधिकारियों के चैंबर के बाहर भी कचरा फैला हुआ है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लग गए हैं, जिससे न केवल यात्रियों को असुविधा हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं।

निजी कंपनी के पास सफाई का ठेका

स्टेशन पर सफाई व्यवस्था का ठेका आरएन इंडस्ट्रीज नामक कंपनी को दिया गया है, जिसका मुख्यालय लखनऊ में है। इस कंपनी के माध्यम से कुल 17 सफाई कर्मचारी और 2 सुपरवाइजर स्टेशन पर तैनात हैं।

सुपरवाइजर शक्ति सिंह के अनुसार, कर्मचारियों को वेतन समय पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि एक महीने का वेतन अगले महीने की 27 तारीख तक दिया जाता है, तब तक नया महीना शुरू हो जाता है। इस देरी के कारण कर्मचारियों को रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में कठिनाई होती है और उन्हें कर्ज लेना पड़ता है।

कर्ज के बोझ में दबे कर्मचारी

कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में देरी के चलते उन्हें घर चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। धीरे-धीरे यह कर्ज बढ़ता जा रहा है और वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि “हम मेहनत करते हैं, लेकिन समय पर पैसे नहीं मिलते। ऐसे में परिवार का खर्च कैसे चलाएं?”

यह समस्या केवल एक-दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी 17 कर्मचारियों की यही स्थिति है। उनका कहना है कि यदि समय पर वेतन मिल जाए, तो वे पूरी ईमानदारी से अपना काम करते रहेंगे।

अधिकारियों को कई बार दी गई जानकारी

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। लिखित और मौखिक रूप से शिकायतें दी गईं, लेकिन किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया, जिससे उन्हें मजबूर होकर हड़ताल करनी पड़ी।

यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

हड़ताल का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। स्टेशन पर गंदगी फैलने के कारण यात्रियों को बैठने, चलने और इंतजार करने में परेशानी हो रही है। प्लेटफॉर्म पर कचरे के ढेर से दुर्गंध फैल रही है, जिससे वातावरण असहज हो गया है।

कई यात्रियों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि रेलवे को इस समस्या का जल्द समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण स्टेशन है जहां से रोजाना हजारों यात्री गुजरते हैं।

स्वास्थ्य और स्वच्छता पर खतरा

स्टेशन पर फैली गंदगी केवल असुविधा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है। कचरे के ढेर से मच्छर और अन्य कीट पनप सकते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

स्वच्छता के अभाव में रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है, जो यात्रियों और कर्मचारियों दोनों के लिए जोखिमपूर्ण है।

रेलवे प्रशासन की चुप्पी

अब तक इस मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। न ही यह जानकारी दी गई है कि कर्मचारियों की मांगों पर क्या कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन की यह चुप्पी स्थिति को और गंभीर बना रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित हस्तक्षेप जरूरी होता है, ताकि स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।

ठेका प्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना ने रेलवे की ठेका प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निजी कंपनियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन भुगतान की व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी नजर आ रही है।

कई बार देखा गया है कि ठेका कंपनियां कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देतीं, जबकि रेलवे की ओर से भुगतान समय पर किया जाता है। ऐसे में यह जांच का विषय बनता है कि आखिर देरी कहां हो रही है।

संभावित समाधान और आगे की राह

इस समस्या का समाधान कई स्तरों पर किया जा सकता है:

  • रेलवे प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की मांगों पर विचार करना चाहिए
  • ठेका कंपनी से जवाब तलब कर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए
  • यदि आवश्यक हो, तो वैकल्पिक व्यवस्था कर स्टेशन की सफाई बहाल करनी चाहिए
  • भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए ठेका प्रणाली में

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