खुरई, सागर – खुरई तहसील की धनोरा ग्राम पंचायत से बड़ी संख्या में ग्रामीण गुरुवार दोपहर तहसीलदार न्यायालय पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री आवास योजना से संबंधित जारी किए गए रिकवरी नोटिस के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें योजना के बारे में जानकारी नहीं थी, फिर भी उनके नाम से राशि निकाली गई और अब उनसे वसूली की जा रही है।
योजना का पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश शासन ने वर्ष 2008 में धनोरा ग्राम पंचायत को मुख्यमंत्री आवास योजना के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना था। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को बैंक के माध्यम से 60,000 रुपए प्रदान किए जाने थे, जिसमें से 30,000 रुपए शासन की सहायता राशि थी और शेष 30,000 रुपए हितग्राही को वापस करने थे। योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को जमीन का पट्टा आवंटित किया गया और पंचायत के माध्यम से आवास निर्माण कराया गया।

वसूली नोटिस और विवाद
धनोरा में बने आवासों में कुछ हितग्राही रह रहे थे, लेकिन कई अन्य कारणों से वहां नहीं पहुंचे। इसके अलावा, कुछ खाली पड़े आवासों पर अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया। योजना की राशि की रिकवरी न होने के कारण बैंक और प्रशासन ने हाल ही में संबंधित हितग्राहियों को नोटिस जारी किए।
ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार डॉ. राकेश कुमार से शिकायत की। ग्रामीण भूपेंद्र अहिरवार ने कहा, “हमने इस योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया था। हमारे नाम से राशि निकाली गई और अब हमसे वसूली की जा रही है। यह खुला भ्रष्टाचार है।”
सरपंच और पंचायत सचिव पर आरोप
ग्रामीणों ने तत्कालीन सरपंच जितेंद्र सिंह ठाकुर और पंचायत सचिव पर योजना में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके कारण उनके नाम पर राशि निकाली गई और अब उन्हें नोटिस का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व सरपंच का बयान
पूर्व सरपंच जितेंद्र सिंह ठाकुर ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत आवास बनाए गए थे और हितग्राहियों को निर्धारित राशि जमा कर आवासों में शिफ्ट होना था। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने न तो राशि जमा की और न ही घरों में रहने आए। उन्होंने कहा कि नोटिस आने पर लोग घबरा रहे हैं, लेकिन यह किसी गड़बड़ी का मामला नहीं है।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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