नीमच नगर पालिका परिषद का बजट सत्र सोमवार को जबरदस्त हंगामे का शिकार हो गया। पुरानी नगर पालिका स्थित सभा कक्ष में कांग्रेस पार्षदों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस घटना ने नगर पालिका के बजट सत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया, और बैठक में असमंजस की स्थिति बन गई।

विवाद की शुरुआत:
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब इंदिरा नगर की पार्षद सुमित्रा मुकेश पोरवाल ने अपने वार्ड में सड़क मंजूरी होने के उपलक्ष्य में नगर पालिका अध्यक्ष का स्वागत करने का प्रस्ताव रखा। उनका उद्देश्य यह था कि इस अवसर पर अध्यक्ष का स्वागत किया जाए।
लेकिन, यह प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति को पसंद नहीं आया। योगेश ने स्पष्ट रूप से आपत्ति जताते हुए कहा कि चूंकि वे विपक्ष में हैं, इसलिए उन्हें अपनी भूमिका निभानी चाहिए और बजट सत्र के दौरान स्वागत जैसी व्यक्तिगत गतिविधियों से बचना चाहिए। उनका कहना था कि यदि स्वागत करना है तो यह सत्र के बाद किया जाना चाहिए, न कि बैठक के दौरान, ताकि सत्र का माहौल प्रभावित न हो।

कांग्रेस पार्षदों के बीच बवाल:
इस पर सुमित्रा पोरवाल ने अपने कदम पर अडिग रहते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि का कार्य जनता की सेवा करना होता है और जब किसी भी प्रतिनिधि को सम्मान मिलता है, तो यह उनके लिए गर्व की बात होती है। उनका मानना था कि स्वागत का अवसर सभी को मिलना चाहिए, और यह किसी सत्ताधारी या विपक्षी के बीच का मुद्दा नहीं होना चाहिए।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस पार्षद हरगोविंद दीवान ने सुमित्रा पोरवाल का समर्थन किया। दोनों के बीच बहस तेज हो गई और देखते ही देखते बात हाथापाई तक पहुंच गई। कांग्रेस पार्षदों के बीच हुए इस हिंसक विवाद को अन्य पार्षदों ने बीच-बचाव कर शांत कराया।
भाजपा ने बजट पारित किया:
हंगामे के बावजूद, सत्तारूढ़ भाजपा ने बहुमत का हवाला देते हुए बजट को सभी की सहमति से पारित कर दिया। यह कदम भाजपा के लिए एक राहत की बात थी क्योंकि उन्हें अपने बजट को पारित कराने में कोई बड़ी रुकावट नहीं आई।

नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया:
नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति ने इस घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि नगर पालिका अध्यक्ष ने जानबूझकर और पूर्व नियोजित तरीके से महिला पार्षद का स्वागत कराने की योजना बनाई थी, जो कि विपक्षी पार्टी के लिए एक अपमानजनक स्थिति थी। योगेश ने यह भी कहा कि इस प्रकार के व्यक्तिगत रिश्ते और स्वागत समारोह सार्वजनिक सत्र के दौरान नहीं होने चाहिए।
योगेश प्रजापति ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ पार्षद भाजपा के साथ मिले हुए हैं और यह गठजोड़ सार्वजनिक रूप से सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को अपने वरिष्ठ नेताओं, जिला अध्यक्ष, और प्रदेश अध्यक्ष के पास उठाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस्तीफा देने पर विचार करेंगे।
सुमित्रा पोरवाल की सफाई:
इस विवाद पर कांग्रेस पार्षद सुमित्रा मुकेश पोरवाल ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि जब वे जीतकर आईं हैं, तो उन्हें सम्मान देना एक सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि वह केवल अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रही थीं और यह स्वागत कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दुर्गा लाल पार्षद के वार्ड में सड़क बनाने के निर्णय के बाद उनका भी स्वागत किया था।

यह घटनाक्रम नीमच नगर पालिका परिषद के सत्र को लेकर एक विवादास्पद मोड़ लेकर आया। जहां एक ओर सत्ताधारी भाजपा ने बजट पारित कर दिया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में आंतरिक विवाद ने पूरे सत्र को हंगामे में बदल दिया। यह घटना दर्शाती है कि स्थानीय निकायों में राजनीतिक दलों के बीच किस हद तक व्यक्तिगत और राजनीतिक प्राथमिकताएं एक-दूसरे से टकरा सकती हैं।
यह विवाद न केवल कांग्रेस पार्टी के भीतर की राजनीति को उजागर करता है, बल्कि नगर पालिका के सत्रों में व्यक्तिगत स्वार्थ और राजनीतिक लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को भी सामने लाता है।