मकरोनिया स्थित सतनाम नर्सिंग होम प्रबंधन का निर्णय – बेटियों को सम्मान और समाजसेवा का संदेश
सागर, 22 सितम्बर 2025।
सागर शहर के मकरोनिया स्थित सतनाम नर्सिंग होम ने नवरात्रि पर्व पर समाज को बेटी बचाने और बेटी का सम्मान करने का अनूठा संदेश दिया है। नर्सिंग होम के सहयोगी और सतनाम वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष श्री मनी सिंह गुरोंन ने घोषणा की है कि प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नवरात्रि के दौरान किसी एक प्रसूति महिला ने कन्या को जन्म दिया तो उसका पूरा खर्च नर्सिंग होम वहन करेगा। इस अवधि में कन्या जन्म पर अस्पताल किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लेगा।

50 वर्षों से सेवा का प्रतीक सतनाम नर्सिंग होम
करीब आधी सदी से सतनाम नर्सिंग होम ने मरीजों के प्रति सेवा-भाव और ईमानदारी को अपना मूल मंत्र बनाया हुआ है। इसके संचालक डॉ. गुरनाम सिंह और उपसंचालक एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिपत कौर अपनी सहज कार्यशैली और मानवीय व्यवहार के कारण न केवल सागर बल्कि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में भी विशेष लोकप्रियता रखते हैं।
शहर में अनेक निजी अस्पताल मौजूद हैं, लेकिन सतनाम नर्सिंग होम ने अपने मानवीय दृष्टिकोण और सेवा भावना से लोगों के बीच एक अलग पहचान बनाई है। यहां आने वाले मरीज केवल इलाज के लिए ही नहीं, बल्कि विश्वास और अपनापन पाने के लिए भी आते हैं।
डॉ. त्रिपत कौर का सामान्य प्रसव पर जोर
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिपत कौर को लोग विशेष रूप से इसलिए भी सम्मान देते हैं क्योंकि वह हर संभव प्रयास करती हैं कि प्रसव सामान्य तरीके से ही हो। उन्होंने अपने चिकित्सकीय अनुभव में आज तक किसी भी प्रसूति महिला का प्रसव केवल सीजर (ऑपरेशन) से न कराकर सामान्य प्रसव कराया है।
उनका मानना है कि सर्जरी में अतिरिक्त खर्च जुड़ता है, जिसे ग्रामीण और कमजोर तबके की महिलाएं वहन नहीं कर पातीं। यही वजह है कि सतनाम नर्सिंग होम में सामान्य प्रसव को प्राथमिकता दी जाती है। डॉ. कौर की यह नीति उन्हें और अस्पताल को आमजन में अलग पहचान दिलाती है।
यहां तक कि एक बार जब डॉ. कौर गंभीर रूप से अस्वस्थ होकर आईसीयू में भर्ती थीं, तब भी लोगों ने उनके लिए दुआएं कीं। ग्रामीणों का कहना था कि जिनकी वजह से हजारों महिलाओं को बिना बोझ के सुरक्षित मातृत्व मिला है, उनके लिए पूरे क्षेत्र की प्रार्थनाएँ साथ थीं।

डॉ. गुरनाम सिंह की करुणा के किस्से
सतनाम नर्सिंग होम के संस्थापक डॉ. गुरनाम सिंह के सेवाभाव की भी अनेक मिसालें मिलती हैं। वे कई बार आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का न केवल मुफ्त इलाज कर चुके हैं बल्कि उन्हें घर लौटने का किराया भी अपनी जेब से दिया है। यही करुणा और मानवता उन्हें लोगों की नजर में सच्चा चिकित्सक बनाती है।
नवरात्रि पर अनूठा निर्णय
इस बार नवरात्रि पर्व पर उपसंचालक डॉ. त्रिपत कौर और सतनाम वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष श्री मनी सिंह ने मिलकर एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसने समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश दिया है।
मनी सिंह का कहना है –
“नवरात्रि शक्ति की भक्ति का पर्व है। सनातन धर्म में कन्या पूजन और कन्याओं का सम्मान विशेष महत्व रखता है। इसी सोच के साथ निर्णय लिया गया है कि नवरात्रि के नौ दिनों में यदि कोई एक महिला कन्या को जन्म देती है, तो उसका संपूर्ण खर्च सतनाम नर्सिंग होम उठाएगा। मरीज से एक भी रुपये का शुल्क नहीं लिया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यह पहल सिर्फ एक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह बेटियों के महत्व को समाज के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास है।
बेटियों के सम्मान का संदेश
सत्कार्य और सेवा भाव के लिए सिख समुदाय का इतिहास जगजाहिर है। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मनी सिंह लगातार समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। उन्होंने समय-समय पर मरीजों को राहत देने और जरूरतमंदों की मदद करने का कार्य किया है। यही कारण है कि कई सामाजिक मंचों पर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।
इस बार उनकी ओर से लिया गया यह निर्णय न केवल मरीजों के लिए आर्थिक राहत है, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान और उनकी महत्ता को रेखांकित करने वाला भी है।

जनसेवा की परंपरा
सतनाम नर्सिंग होम केवल इलाज का केंद्र नहीं बल्कि सेवा का प्रतीक बन चुका है। यहां इलाज कराने आने वाले लोग कहते हैं कि इस अस्पताल ने चिकित्सक और मरीज के बीच विश्वास की उस डोर को जीवित रखा है, जो अब धीरे-धीरे अन्य जगहों पर कमजोर होती जा रही है।
डॉ. गुरनाम सिंह और डॉ. त्रिपत कौर की सेवा भावना, और अब मनी सिंह का यह सामाजिक निर्णय, सब मिलकर यह साबित करते हैं कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है।
नवरात्रि में कन्या जन्म पर खर्च उठाने का निर्णय सतनाम नर्सिंग होम और मनी सिंह की ओर से समाज को बेटी बचाने और बेटी का सम्मान करने का गहरा संदेश देता है। यह पहल न केवल धार्मिक भावना से जुड़ी है, बल्कि सामाजिक सरोकार और जनसेवा की सच्ची मिसाल भी है।
जब एक ओर समाज में बेटियों को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिलता है, वहीं राहत की बात है कि सतनाम नर्सिंग होम जैसे संस्थान बेटियों के सम्मान और संरक्षण के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं। निस्संदेह, यह निर्णय नवरात्रि पर्व को और भी पावन और सार्थक बना देगा।