बांदरी।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान-2026 के अंतर्गत बांदरी स्थित विधायक कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में युवा नेता अविराज सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को राजनीति में सशक्त मंच प्रदान करेगा और उनकी भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का सही आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति से किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक निर्णायक पहल है।

अविराज सिंह ने बताया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिससे नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक संवेदनशील, समावेशी और व्यापक बनेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल सीटों का आरक्षण नहीं है, बल्कि समाज की संरचना में सकारात्मक बदलाव का आधार भी बनेगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल से विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाओं को नेतृत्व के अवसर प्राप्त होंगे। इससे नई पीढ़ी के सामने प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होंगे और महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक महिलाओं को समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
अविराज सिंह ने जानकारी दी कि अप्रैल माह में अंबेडकर जयंती के अवसर पर नारी शक्ति वंदन को लेकर उत्सवी पखवाड़ा मनाया जाएगा। इस दौरान विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी और डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में भी इस विषय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज के हर वर्ग तक इस महत्वपूर्ण पहल का संदेश पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण देने की मांग आजादी के बाद से लगातार उठती रही है, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारें इसे लागू नहीं कर सकीं। इस संदर्भ में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी प्रयास हुए थे, लेकिन राजनीतिक सहमति के अभाव में यह संभव नहीं हो सका। आज वही सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत समानता, समावेश और जनभागीदारी के सिद्धांतों पर आगे बढ़ रहा है। संसद द्वारा लिया गया यह निर्णय लोकतंत्र को और अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत बनाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीतियां अधिक जनहितकारी और संवेदनशील बनेंगी।

अविराज सिंह ने देश के विकास के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत तकनीक और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर को देश में अग्रणी बताते हुए ‘केन-बेतवा लिंक’ जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जो जल प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आमजन को व्यापक लाभ मिल रहा है। किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि ‘संबल 2.0’ जैसी योजनाएं असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है।
उन्होंने आधारभूत संरचना के विकास को लेकर भी सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में एक्सप्रेस-वे निर्माण में ऐतिहासिक प्रगति हुई है और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंच रहा है। गरीबों को मुफ्त अनाज वितरण, महिलाओं के लिए ‘लखपति दीदी’ योजना और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता जैसे कदम देश को सशक्त बना रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर उसे मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास को बढ़ावा मिला है।
अविराज सिंह ने सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण को भी सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और काशी, उज्जैन व केदारनाथ धाम के पुनरुद्धार कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देश की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिली है।

अंत में उन्होंने कहा कि भारत आज 4.1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्ष 2030 तक भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा कार्यबल होगा। ऐसे में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा पर भी जोर देते हुए कहा कि इससे देश में चुनावी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और संसाधन-संवेदनशील बन सकती है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी से महिलाओं के सशक्तिकरण और देश के समग्र विकास में योगदान देने की अपील की।