इंदौर: मंगलवार (3 जनवरी) को पटना-इंदौर एक्सप्रेस (19322) के एच-1 कोच में काम करने वाले अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत को कछुआ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरपीएफ की तलाशी के दौरान उनके दो बैग से कुल 311 जीवित इंडियन टेंट टर्टल बरामद हुए।
तलाशी के दौरान खुलासा
आरपीएफ की टीम ट्रेन में अवैध शराब की जांच कर रही थी। इसी दौरान ASI हेमंत कुमार राजपूत और आर. जॉनी कुमार ने अटेंडेंट अजय सिंह की तलाशी ली। उनके दो बैग में छोटे-छोटे जीवित कछुए पाए गए।

आरपीएफ के मुताबिक अजय मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है और लगभग चार साल से ट्रेन में अटेंडेंट के रूप में काम कर रहा था। यह नौकरी उसे एक निजी एजेंसी के माध्यम से मिली थी, जो वेस्टर्न रेलवे के इस रेक के स्टाफ सप्लाई और मेंटेनेंस का ठेका रखती है।
आरोपी की पूछताछ
पूछताछ में अजय ने बताया कि उसे लखनऊ में एक व्यक्ति ने दो बैग सौंपे थे। एक बैग देवास में और दूसरा इंदौर में डिलीवर करना था। इसके एवज में उसे देवास में 1,000 और इंदौर में 1,500 रुपए मिलने थे। आरोपी ने माना कि पैसों के लालच में उसने यह काम किया और यह उसकी पहली तस्करी थी।
आरपीएफ अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल यह किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़ा मामला नहीं लग रहा, लेकिन लखनऊ से जुड़े संपर्कों और डिलीवरी पॉइंट्स की जांच जारी है।
कछुए की कीमत और संरक्षण
इक्वेरियम कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि छोटे कछुओं की कीमत लगभग 2,000 से 5,000 रुपए तक होती है। ऐसे में 311 कछुओं की यह खेप अवैध बाजार में लाखों रुपए की मानी जा सकती थी।
वन विभाग की टीम ने सभी 311 कछुओं को संरक्षण में ले लिया है और बताया कि इन्हें प्राकृतिक जल स्रोतों में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।
कानूनी पहलू और सजा
बरामद कछुए इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के हैं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं। इनके पालन, परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध है। आरोपी के खिलाफ तीन से सात साल तक की जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

इंडियन टेंट टर्टल के बारे में जानकारी
- प्राकृतिक स्वच्छताकर्मी होते हैं, पानी में काई और शैवाल खाकर उसे साफ रखते हैं।
- ऑक्सीजन लेवल बढ़ाकर नदी के इकोसिस्टम को स्वस्थ रखते हैं।
- गंगा, नर्मदा जैसी साफ नदियों में पाए जाते हैं।
- छोटे नरम खोल वाले, लंबाई लगभग 350 मिलीमीटर।
- कवच तंबू के आकार का होने के कारण ‘टेंट टर्टल’ कहलाते हैं।
- एक्वेरियम शौक के कारण इनकी तस्करी बढ़ रही है।
ट्रेन में छिपाने की कोशिश
अजय फर्स्ट एसी कोच का अटेंडेंट था, जिसके पास निजी केबिन और बेडरोल स्टोरेज की सुविधा थी। उसने दोनों बैग उसी केबिन में रखे थे। अधिकारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर इस रूट पर शराब जैसी अवैध वस्तुओं की जांच होती है, इसलिए कछुओं की तस्करी का किसी ने अंदाजा नहीं लगाया था।