संभाग में यात्री परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित और नियमबद्ध बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में सागर संभाग आयुक्त की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें परिवहन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि परमिट शर्तों का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सागर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस बैठक में संभाग के सभी जिलों के अपर कलेक्टर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं परिवहन अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आयुक्त ने विशेष रूप से उन 133 यात्री बसों की जांच पर जोर दिया, जिनकी सूची पहले से तैयार की गई है। निर्देश दिए गए कि यदि कोई भी बस परमिट शर्तों के विपरीत संचालित होती पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही संबंधित टोल प्लाजा से भी बसों की आवाजाही और गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान आसानी से हो सके। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और यात्रियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
बैठक में स्लीपर बसों की नियमित जांच को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी स्लीपर बसों में एआईएस-119 बस बॉडी कोड के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। इसके अंतर्गत बसों में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग दो दरवाजों की व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा के लिए फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS), आगे और पीछे 10-10 किलोग्राम के अग्निशमन यंत्र तथा चार इमरजेंसी गेट अनिवार्य रूप से होने चाहिए। इन इमरजेंसी गेट्स में ड्राइवर साइड, पीछे का गेटवे और छत पर आगे-पीछे के गेट शामिल हैं।

साधारण श्रेणी की बसों के लिए भी फिटनेस जांच अनिवार्य कर दी गई है। इन बसों में भी अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन करते हुए कम से कम दो अग्निशमन यंत्र लगाए जाने जरूरी हैं। साथ ही इन बसों में भी प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग दो दरवाजे और कम से कम एक इमरजेंसी गेट होना अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा सभी यात्री बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन लगाए जाने और उनके सही तरीके से कार्य करने की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आगामी शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण ओवरलोडिंग और ओवरस्पीडिंग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसे रोकने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बस संचालक यात्रियों से निर्धारित किराए से अधिक राशि न वसूलें।
स्कूल बसों की जांच को लेकर भी बैठक में गंभीरता दिखाई गई। निर्देश दिए गए कि सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे हों और वे चालू हालत में हों। प्रत्येक बस में एक अटेंडर होना अनिवार्य किया गया है। विशेष रूप से छात्राओं के परिवहन के दौरान महिला अटेंडर या महिला शिक्षिका की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में यह भी सामने आया कि कई बार शादी-विवाह जैसे आयोजनों में स्कूल बसों का उपयोग बिना परमिट के मैरिज पार्टी के परिवहन के लिए किया जाता है। इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे मामलों में अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
संभाग आयुक्त ने यह भी कहा कि सभी परिवहन अधिकारी अपने-अपने जिलों में बस संचालकों की बैठक आयोजित करें और उन्हें इन नियमों के पालन के लिए जागरूक करें। साथ ही जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हर माह आयोजित करने और लिए गए निर्णयों का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
इस व्यापक कार्रवाई और सख्त निर्देशों से यह स्पष्ट है कि प्रशासन अब यात्री सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतेगा। आने वाले दिनों में सघन जांच अभियान के माध्यम से नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।