लाहौर/इस्लामाबाद।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक बार फिर अपने वैचारिक और कट्टरपंथी रुख को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस्लाम के नाम पर बने पाकिस्तान का “असली मकसद” अब पूरा होने वाला है। यह बयान उन्होंने रविवार को लाहौर में पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल से अनौपचारिक बातचीत के दौरान दिया।
नवाज शरीफ के परिवारिक समारोह में दिया बयान
जनरल आसिम मुनीर लाहौर में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नाती और शहबाज शरीफ के पोते जुनैद सफदर के वलीमा (रिसेप्शन) में शामिल होने पहुंचे थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नवाज शरीफ, मरियम नवाज, कई वरिष्ठ नेता, मंत्री और उच्च सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पाकिस्तान की वैचारिक पहचान और भविष्य को लेकर अहम टिप्पणियां कीं।

“अल्लाह ने पाकिस्तान को ऐतिहासिक मौका दिया”
आसिम मुनीर ने कहा कि अल्लाह ने पाकिस्तान को एक ऐतिहासिक अवसर दिया है, ताकि वह अपने अस्तित्व के उद्देश्य को पूरा कर सके। उनके मुताबिक पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था और आज उसे इस्लामिक देशों के बीच एक विशेष दर्जा हासिल है, जो आने वाले समय में और मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि देश तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके लिए उसका गठन हुआ था।
पाकिस्तान की स्थिति और अर्थव्यवस्था पर दावा
आर्मी चीफ ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति और उसकी आर्थिक हालत में “काफी सुधार” हुआ है।
जब उनसे व्यक्तिगत स्तर पर मिल रही अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रशंसा को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कोई सराहना मिल रही है तो वह भी अल्लाह की मेहरबानी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे पाकिस्तान की पहचान है।

ट्रम्प से कथित संपर्कों से जोड़ा जा रहा बयान
जनरल मुनीर के इस बयान को हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ी चर्चाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका को पाकिस्तान में दुर्लभ खनिजों और कच्चे तेल के संसाधनों का भरोसा दिलाया है, हालांकि इन संसाधनों को लेकर अब तक कोई ठोस और सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पहले भी दे चुके हैं कट्टर बयान
यह पहली बार नहीं है जब जनरल आसिम मुनीर ने इस तरह के वैचारिक बयान दिए हों।
अप्रैल 2025 में इस्लामाबाद में हुए ओवरसीज पाकिस्तानियों के सम्मेलन में उन्होंने टू नेशन थ्योरी को पाकिस्तान की बुनियाद बताया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि मुसलमानों और हिंदुओं के बीच बुनियादी फर्क है और दोनों अलग-अलग राष्ट्र हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान की नींव कलमा पर टिकी है और इस सोच को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
भारत और कश्मीर पर सख्त रुख
आसिम मुनीर अपने भाषणों में लगातार भारत, कश्मीर और टू नेशन थ्योरी को लेकर तीखी बयानबाजी करते रहे हैं। पिछले साल अप्रैल में इस्लामाबाद में हुए पहले ओवरसीज पाकिस्तानी सम्मेलन में भी उन्होंने कश्मीर और भारत को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी।
पुराने सेना प्रमुखों से अलग छवि
जनरल आसिम मुनीर को पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुखों से बिल्कुल अलग माना जाता है। जहां पहले के अधिकांश सेना प्रमुख पश्चिमी सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षित पेशेवर सैनिक थे और सार्वजनिक तौर पर धर्म व राजनीति से दूरी बनाए रखते थे, वहीं मुनीर की पहचान एक धार्मिक नेता जैसी भी है।
वे हाफिज-ए-कुरान हैं और धर्म उनकी सार्वजनिक छवि का अहम हिस्सा है। वह पाकिस्तान के पहले ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस और ISI—दोनों की कमान संभाली है।
सेना को ‘इस्लाम की रक्षक’ के रूप में पेश करने की कोशिश
आसिम मुनीर की अगुवाई में पाकिस्तानी सेना खुद को केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली ताकत नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने वाली संस्था के रूप में भी पेश कर रही है।
इसके तहत सेना पुराने इस्लामिक और अरबी प्रतीकों का इस्तेमाल कर रही है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय विद्रोही संगठनों को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ जैसे नाम दिए जा रहे हैं और उन्हें गुमराह ताकतें तथा भारत समर्थित बताया जा रहा है।