पुस्तकें और यूनिफॉर्म की उपलब्धता को लेकर प्रशासन सक्रिय, कलेक्ट्रेट में समन्वय बैठक आयोजित !

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सागर। जिले में निजी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों और यूनिफॉर्म की उपलब्धता को सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने की। बैठक में जिले के पुस्तक विक्रेताओं, गणवेश विक्रेताओं और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी से बचाना, शिक्षा सामग्री की उपलब्धता को आसान बनाना और स्कूलों में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना रहा। इस दौरान प्रशासन ने अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने और छात्रों को समय पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश साझा किए।

अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने सभी पुस्तक विक्रेताओं से आग्रह किया कि आगामी पुस्तक मेले में वे अनिवार्य रूप से अपने स्टॉल लगाएं। प्रशासन की योजना है कि अभिभावकों को किताबें खरीदने के लिए अलग-अलग दुकानों के चक्कर न लगाने पड़ें। यदि सभी अधिकृत विक्रेता एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेंगे तो अभिभावकों को आवश्यक पुस्तकें और अन्य सामग्री एक ही स्थान पर आसानी से मिल सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि विक्रेता यह सुनिश्चित करें कि पुस्तक मेले में छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकों के पूरे सेट उपलब्ध हों, ताकि अभिभावकों को अधूरी सामग्री के कारण दोबारा दुकानों के चक्कर न लगाने पड़ें। मेले के दौरान सभी अधिकृत पुस्तक विक्रेता एक ही स्थान पर मौजूद रहेंगे, जिससे अभिभावकों को पुस्तकों के चयन और खरीद में सुविधा मिलेगी।

बैठक में पुस्तकों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एनसीईआरटी और अन्य प्रमाणित प्रकाशनों की ही पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही डुप्लीकेट या नकली किताबों की बिक्री को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

पर्यावरण संरक्षण और अभिभावकों की आर्थिक बचत को ध्यान में रखते हुए यह सुझाव भी दिया गया कि अगले तीन से चार वर्षों तक पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव न किए जाएं। इससे वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र अपनी पुरानी पुस्तकें कनिष्ठ छात्रों को दे सकेंगे, जिससे अभिभावकों का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अभिभावकों को किताबों के साथ कॉपी, स्टेशनरी या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। वे अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार ही सामग्री खरीद सकेंगे।

स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर भी चर्चा की गई। अपर कलेक्टर ने गणवेश तैयार करने वाले टेलर्स को निर्देश दिए कि वे यूनिफॉर्म का पर्याप्त स्टॉक रखें और छात्रों के सही साइज का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि छात्रों को ट्रायल कराए बिना और अभिभावकों की सहमति के बिना यूनिफॉर्म से संबंधित कोई नया नियम लागू नहीं किया जाना चाहिए।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी फैलाने से बचा जाए। अधिकृत और प्रमाणित जानकारी केवल जनसंपर्क विभाग (पीआरओ) के माध्यम से ही जारी की जाएगी, ताकि जनता तक सही और सटीक सूचना पहुंचे।

अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने बैठक में मौजूद सभी पक्षों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें स्कूल प्रबंधन, विक्रेता और अभिभावक मिलकर छात्रों के हित में काम कर सकें।

बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन, अभय श्रीवास्तव सहित जिले के सभी प्रमुख पुस्तक और गणवेश विक्रेता उपस्थित रहे। सभी ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए पारदर्शी और व्यवस्थित व्यवस्था बनाने में सहयोग का भरोसा दिलाया।

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