प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में पता चला है कि मुफ्त राशन लेने वालों में गरीबों के साथ-साथ करोड़पति परिवार और सरकारी नौकरी करने वाले लोग भी शामिल हैं। खाद्य विभाग की पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि पूरे प्रदेश के 55 जिलों में सबसे ज्यादा मुफ्त राशन सागर जिले में बांटा जा रहा है।

📊 सागर में 4.81 लाख परिवार उठा रहे मुफ्त राशन, आबादी का 67% लाभार्थी
सागर जिले में 4,81,455 परिवारों को हर महीने मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। इन परिवारों के कुल 18,73,760 सदस्य हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जिले की करीब 67% आबादी मुफ्त राशन ले रही है।
खाद्य विभाग के अनुसार, यह अनुपात प्रदेश के किसी भी अन्य जिले से अधिक है। विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए आयकर विभाग के डाटा के आधार पर फर्जी लाभार्थियों की पहचान शुरू की है।
⚠️ 4475 परिवारों को जारी हुए नोटिस, करोड़पति से लेकर कंपनी डायरेक्टर तक शामिल
फिलहाल सागर जिले में 4475 परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से —
- 3528 परिवारों की सालाना आय 6 लाख रुपए से ज्यादा है,
- 67 परिवारों का वार्षिक टर्नओवर 25 लाख रुपए से ऊपर है,
- जबकि 574 परिवारों के मुखिया ऐसे हैं, जो अपनी निजी फर्म चलाते हैं और डायरेक्टर पद पर हैं।
खाद्य विभाग ने यह जानकारी आयकर विभाग से प्राप्त आय विवरणों के आधार पर जुटाई है। इन परिवारों से अब शपथ-पत्र और आय प्रमाण पत्र मांगे गए हैं।

📜 नोटिस बेटों को, जवाब माता-पिता दे रहे — जांच में सामने आई अनोखी स्थिति
जिले के कई नोटिसधारकों ने अपने बचाव में गैर-संबंधित व्यक्तियों से जवाब भिजवाए हैं।
उदाहरण के तौर पर —
- दयानंद वार्ड निवासी अक्षय साहू के नाम नोटिस जारी हुआ, लेकिन जवाब उनकी मां अचला साहू ने दिया। उनका कहना है कि बेटों की शादी हो चुकी है और वे अलग रहते हैं, जबकि वह खुद अकेली हैं और उनकी कोई आय नहीं है।
- इसी तरह कैंट क्षेत्र निवासी अरुण यादव को जारी नोटिस का जवाब गेंदालाल यादव ने शपथ-पत्र देकर दिया और अपनी आय सालाना 40-50 हजार रुपए बताई।
इन मामलों ने विभाग की जांच को और जटिल बना दिया है।
🏪 सिर्फ सागर में हर माह 20 करोड़ से ज्यादा का राशन वितरण
खाद्य विभाग के अनुसार, प्रति व्यक्ति 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल हर महीने बांटा जाता है।
सागर जिले में 18.73 लाख लोगों को राशन वितरण के लिए औसतन हर माह —
- 74,950 क्विंटल गेहूं और
- 18,737 क्विंटल चावल की आवश्यकता होती है।
यदि औसत दर गेहूं की ₹2,000 प्रति क्विंटल और चावल की ₹3,000 प्रति क्विंटल मानी जाए, तो सिर्फ सागर जिले में हर महीने ₹20.61 करोड़ रुपए का राशन बांटा जा रहा है।
वहीं पूरे प्रदेश में लगभग 5.34 करोड़ लोगों को ₹587 करोड़ रुपए का खाद्यान्न हर माह वितरित किया जा रहा है।
🧾 जिले में 1.49 लाख लोग “अति गरीब” श्रेणी में शामिल
खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 42,982 परिवारों के 1,49,503 सदस्य अति गरीब श्रेणी में आते हैं।
इनके अलावा बीड़ी श्रमिक, फेरीवाले, घरेलू कामकाजी महिलाएं, पेंशनधारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े लोग भी राशन के हकदार हैं। कुल मिलाकर विभाग ने 29 प्रकार की श्रेणियों में पात्र परिवारों को शामिल किया है।
📍 सबसे ज्यादा गड़बड़ी सागर नगर निगम क्षेत्र में
4475 में से 1407 परिवार सागर नगर निगम क्षेत्र के हैं।
इनमें —
- 86 फर्म डायरेक्टर मुफ्त राशन ले रहे हैं,
- 26 लाभार्थियों का वार्षिक टर्नओवर 25 लाख रुपए से अधिक है,
- और 1252 परिवार ऐसे हैं जिनकी आय 6 लाख रुपए से ऊपर है।
🚫 लोग जवाब नहीं दे रहे, अगले माह से बंद होंगी राशन पर्चियां
खाद्य विभाग द्वारा जारी नोटिसों पर अब तक केवल 30 से 40 परिवारों ने ही जवाब दिए हैं।
शेष लोगों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विभाग का कहना है कि जो लोग जवाब नहीं देंगे, उनकी राशन पर्चियां अगले महीने से जारी नहीं की जाएंगी।
ज्योति बघेल, जिला आपूर्ति नियंत्रक, ने बताया —
“प्रदेश मुख्यालय से जारी नोटिसों के बाद हमने स्थानीय स्तर पर जांच शुरू कर दी है। लेकिन कई परिवार जवाब देने से बच रहे हैं। ऐसे सभी परिवारों की पात्रता अगले वितरण चक्र में समाप्त कर दी जाएगी।”