मध्यप्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता को लेकर आम जनता के बीच फैली आशंकाओं के बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में एलपीजी सहित सभी पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति बनी हुई है। अनुराग जैन ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों एवं सभी जिलों के कलेक्टर्स के साथ बैठक कर स्थिति की विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक निर्देश जारी किए।
मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और ऑयल कंपनियों के डिपो से निरंतर आपूर्ति जारी है। उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में प्रतिदिन स्थिति की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने विशेष रूप से जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों पर तुरंत और कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य स्तर और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी। इससे किसी भी संभावित समस्या का समय रहते समाधान किया जा सकेगा। हाल के दिनों में कुछ स्थानों पर देखी गई पैनिक बुकिंग और गैस एजेंसियों तथा पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों की स्थिति अब सामान्य हो गई है, जिस पर मुख्य सचिव ने संतोष व्यक्त किया।

मुख्य सचिव ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने उन जिलों में, जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है, अधिक से अधिक घरों तक कनेक्शन पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने को कहा गया। साथ ही कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि वे एजेंसियों को आवश्यक वर्कफोर्स उपलब्ध कराएं, ताकि अगले तीन महीनों के भीतर अधिकतम घरों में पाइप के माध्यम से गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी के लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि लोग इस सुविधा को अपनाने के लिए प्रेरित हों। इसके अलावा, जिन घरों में किसी कारणवश पीएनजी कनेक्शन बंद हो गए हैं, उन्हें पुनः शुरू करने के निर्देश भी दिए गए। कॉलोनियों में विशेष शिविर आयोजित कर नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में जमाखोरी और मुनाफाखोरी के मामलों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, जिसमें भारी जुर्माना और जरूरत पड़ने पर एजेंसियों का निलंबन भी शामिल है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई बार एजेंसियां अपने कर्मचारियों के माध्यम से भी कालाबाजारी कराती हैं, ऐसे मामलों में भी कड़ी निगरानी रखी जाए।
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 3029 गैस सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं और 2759 छापेमारी की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा दोषियों के खिलाफ 11 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। यह दर्शाता है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी बैठक में चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सके।
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि राज्य को केंद्र सरकार से अतिरिक्त 10 प्रतिशत एलपीजी आवंटन प्राप्त हुआ है। वहीं, 27 मार्च 2026 को केंद्र द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त कॉमर्शियल एलपीजी आवंटित किया गया है। इस अतिरिक्त आपूर्ति का उपयोग स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, केमिकल्स और प्लास्टिक जैसे उद्योगों में किया जा रहा है।
केरोसीन के वितरण को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बताया गया कि केरोसीन का वितरण मांग के आधार पर किया जाएगा और प्रत्येक जिले में दो पेट्रोल पंपों के निर्धारण की प्रक्रिया जारी है। गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए आरओयू (Right of Use) आवेदनों को 24 घंटे के भीतर स्वीकृति देने की प्रक्रिया भी लागू की जा रही है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में तेजी आएगी।
समग्र रूप से देखा जाए तो राज्य सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता को लेकर पूरी तरह सतर्क है और आम जनता को राहत देने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा जमाखोरी और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।