प्रयागराज माघ मेला: नारायण शुक्ला धाम शिविर में भीषण आग, 15 टेंट और 20 दुकानें जलकर राख !

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प्रयागराज। माघ मेला क्षेत्र में मंगलवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सेक्टर-5 स्थित नारायण शुक्ला धाम शिविर में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि करीब 5 किलोमीटर दूर से लपटें और काला धुआं साफ दिखाई देने लगा। इस हादसे में शिविर के 15 टेंट और आसपास की करीब 20 दुकानें जलकर पूरी तरह राख हो गईं। गनीमत रही कि समय रहते सभी कल्पवासियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और अब तक किसी के झुलसने की सूचना नहीं है।

अचानक भड़की आग, मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंगलवार शाम अचानक शिविर के एक टेंट से आग की लपटें उठने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे शिविर को अपनी चपेट में ले लिया। नारायण शुक्ला धाम शिविर में कुल 15 टेंट लगे थे, जिनमें 50 से अधिक कल्पवासी ठहरे हुए थे। आग भड़कते ही टेंटों के भीतर धुआं भर गया, जिसके बाद हल्ला मच गया और लोग जान बचाकर बाहर की ओर भागे।

पुलिस-संतों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों और संतों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद महज 10 मिनट के भीतर एक-एक कर दमकल विभाग की 5 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, हालांकि आग रुक-रुककर भड़कती रही।

मुख्य शिविर पूरी तरह खाक
आग की चपेट में आकर नारायण धाम का मुख्य शिविर पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। शिविर में लगा एक भी टेंट नहीं बच पाया। इसके साथ ही आसपास की लगभग 20 दुकानों को भी भारी नुकसान हुआ है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस अग्निकांड में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका
प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

सतुआ बाबा ने लिया जायजा
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले सतुआ बाबा मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से घटना की पूरी जानकारी ली और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। बताया गया कि शिविर का निर्माण लल्लू एंड संस और लल्लू ब्रदर्स द्वारा किया गया था, जो एक ही परिवार की कंपनियां हैं।

राहत की बात
इस भीषण हादसे के बावजूद राहत की बात यह रही कि सभी कल्पवासियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की व्यवस्था शुरू कर दी है।

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