बुंदेलखंड की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी ऐरन में प्रस्तावित तीन दिवसीय महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। करीब सवा साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीना दौरे के दौरान इस महोत्सव के आयोजन की घोषणा की थी। अब संस्कृति विभाग इसे मूर्त रूप देने में जुट गया है।
शनिवार दोपहर संस्कृति विभाग के जॉइंट डायरेक्टर रितेश सिंह, एसडीएम विजय डेहरिया और नायब तहसीलदार हेमराज मेहर ऐरन पहुंचे। अधिकारियों ने प्रस्तावित महोत्सव स्थल सहित ऐरन के ऐतिहासिक परिसर का निरीक्षण किया और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की।

ऐरन प्राचीन भारत की अमूल्य धरोहरों में शामिल है। यहां भीम गजा, भगवान वराह की विशाल प्रतिमा के साथ शैव और वैष्णव परंपरा से जुड़ी अनेक दुर्लभ मूर्तियां मौजूद हैं। ये प्रतिमाएं गुप्तकालीन कला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती हैं और ऐरन के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं।
गुप्तकालीन इतिहास में ऐरन का विशेष उल्लेख मिलता है। यहां से प्राप्त शिलालेख तत्कालीन शासन व्यवस्था, धर्म और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। इसी वजह से ऐरन को मध्यप्रदेश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है।

एसडीएम विजय डेहरिया ने बताया कि महोत्सव की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन आयोजन को ऐरन के ऐतिहासिक स्वरूप के अनुरूप भव्य बनाने की तैयारी की जा रही है। महोत्सव को देखते हुए सड़क निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और पर्यटकों की सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी लाई गई है।
वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भी ऐतिहासिक प्रतिमाओं और स्थल के संरक्षण को लेकर व्यवस्थाएं सुदृढ़ कर रहा है। तीन दिवसीय इस महोत्सव के माध्यम से ऐरन की ऐतिहासिक विरासत, प्राचीन प्रतिमाओं और सांस्कृतिक धरोहर को व्यापक पहचान दिलाने का उद्देश्य रखा गया है।