मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पकड़े गए इंटरस्टेट चोर गिरोह ने पुलिस और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। यह पति-पत्नी की जोड़ी बिल्कुल फिल्मी अंदाज में चोरी की वारदातों को अंजाम देती थी, जिसके चलते इसकी तुलना मशहूर फिल्म बंटी और बबली से की जा रही है। लेकिन यह कहानी केवल स्टाइल तक सीमित नहीं है—इसके पीछे एक संगठित और शातिर अपराध नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आई है।

गिरोह का खुलासा: कई राज्यों में फैला नेटवर्क
ग्वालियर पुलिस ने जिस गिरोह को पकड़ा है, उसका सरगना अरविंद रजक और उसकी पत्नी ज्योति रजक हैं। पुलिस जांच के अनुसार यह गैंग मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित 12 से अधिक शहरों में सक्रिय था और अब तक 57 से ज्यादा चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
अरविंद रजक के खिलाफ अकेले 56 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो इस बात का संकेत है कि वह लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा है। उसकी पत्नी ज्योति भी इस नेटवर्क का हिस्सा थी, हालांकि उसके खिलाफ मामलों की संख्या कम है।
सीरियल चोरी का तरीका
यह गैंग बेहद योजनाबद्ध तरीके से चोरी करता था।
- पहले सूने मकानों की रेकी करता
- आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता
- रात के समय घर में घुसकर चोरी करता
- नकदी और सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हो जाता
एक ही इलाके में लगातार कई वारदात करना इसकी खास पहचान थी। ग्वालियर के महाराजपुरा क्षेत्र में 7 चोरियों का खुलासा हो चुका है, जबकि बहोड़ापुर क्षेत्र में भी इसके सुराग मिले हैं।

गरीबी का दिखावा, लग्जरी जिंदगी
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अरविंद खुद को गरीब दिखाता था—फटेहाल कपड़े पहनता था और सामान्य जीवन जीने का दिखावा करता था। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी।
- वह कई बार फ्लाइट से अहमदाबाद तक यात्रा कर चुका है
- उसने करीब 18 लाख रुपए की Kia Seltos लग्जरी कार नकद में खरीदी
- आलीशान मकान बनाने की योजना बना रहा था
यह दोहरी जिंदगी अपराधियों की सामान्य रणनीति को दर्शाती है—बाहरी रूप से साधारण और अंदर से संगठित व आर्थिक रूप से मजबूत।
मोबाइल से मिला बड़ा सुराग
अरविंद खुद मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करता था, जिससे वह ट्रैकिंग से बच सके। लेकिन उसकी पत्नी ज्योति के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके मोबाइल में उत्तर प्रदेश के एक पुलिस इंस्पेक्टर का “गुड मॉर्निंग” मैसेज मिला। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि यह केवल सामान्य संपर्क था या इसके पीछे कोई और संबंध है।
जेल से निकलते ही फिर शुरू अपराध
अरविंद रजक पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुका है। वह झांसी में पकड़ा गया था और 19 महीने जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में रिहा हुआ।
लेकिन जेल से बाहर आते ही उसने फिर से चोरी की घटनाएं शुरू कर दीं। यह दर्शाता है कि उसके लिए अपराध केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आदत बन चुका था।
कानूनी लड़ाई और हाईप्रोफाइल बचाव
गिरफ्तारी के बाद एक और दिलचस्प पहलू सामने आया—अरविंद की जमानत के लिए हाईकोर्ट के छह वकील थाने पहुंच गए। उन्होंने पुलिस को कानूनी तर्क देकर समझाने की कोशिश की, लेकिन कार्रवाई सही पाए जाने पर उन्हें सफलता नहीं मिली।
यह घटना यह भी दिखाती है कि अपराध से अर्जित धन का उपयोग कानूनी बचाव के लिए भी किया जाता है।
फ्लाइट यात्रा और अंतरराज्यीय कनेक्शन
पुलिस को जानकारी मिली है कि अरविंद कई बार अहमदाबाद और अन्य शहरों के बीच हवाई यात्रा कर चुका है। यह जानकारी चौंकाने वाली है, क्योंकि एक तरफ वह खुद को गरीब बताता था और दूसरी तरफ महंगे सफर करता था।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि गिरोह का नेटवर्क केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था।
चोरी के पैसों का निवेश
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी से कमाए गए पैसे कहां निवेश किए गए।
- लग्जरी कार
- प्लॉट और मकान
- यात्रा और अन्य खर्च
अब तक करीब 20 लाख रुपए का माल बरामद किया जा चुका है, लेकिन संभावना है कि कुल रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।
अपराध के पीछे की मानसिकता
पूछताछ में अरविंद ने चोरी का कारण अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को बताया—पिता और भाई के इलाज का खर्च। हालांकि, पुलिस का मानना है कि यह केवल एक बहाना हो सकता है, क्योंकि उसके खर्च और जीवनशैली इस दावे से मेल नहीं खाते।
यह मामला यह भी दिखाता है कि कई बार अपराध केवल मजबूरी नहीं, बल्कि लालच और आसान पैसे की चाह का परिणाम होता है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
ग्वालियर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब:
- अन्य राज्यों से रिकॉर्ड जुटा रही है
- फ्लाइट यात्रा के प्रमाण खंगाल रही है
- चोरी के पैसों के निवेश की जांच कर रही है
- लग्जरी कार को जब्त करने की तैयारी कर रही है
समाज के लिए संदेश
यह मामला कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:
- अपराध का जीवन अंततः गिरफ्तारी तक ही पहुंचता है
- दिखावे और हकीकत में बड़ा अंतर हो सकता है
- तकनीकी जांच और समन्वय से बड़े गिरोह भी पकड़े जा सकते हैं
ग्वालियर में पकड़ा गया यह ‘बंटी-बबली’ स्टाइल गिरोह केवल एक चोरी का मामला नहीं, बल्कि संगठित अपराध, दोहरी जिंदगी और कानून से बचने की रणनीतियों का एक जटिल उदाहरण है।
बंटी और बबली की तरह यह जोड़ी भी लंबे समय तक पुलिस को चकमा देती रही, लेकिन आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गई।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, अंततः कानून से बच पाना संभव नहीं है।