बंडा नगर परिषद में हंगामा: पार्षद ने CMO को दी धमकी, जातिसूचक शब्दों के आरोप में FIR दर्ज !

Spread the love

सागर जिले की बंडा नगर परिषद में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक भाजपा पार्षद ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के चेंबर में घुसकर अभद्रता और धमकी दी। घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में नाराजगी फैल गई, वहीं पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्षद के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


चेंबर में घुसकर किया विवाद

जानकारी के अनुसार, बंडा नगर परिषद के सीएमओ आरसी अहिरवार गुरुवार दोपहर अपने कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थे। इसी दौरान नगर परिषद के पार्षद प्रभुदयाल राठौर अचानक उनके चेंबर में पहुंच गए।

बताया जा रहा है कि पार्षद अपने पुराने निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर दबाव बनाने आए थे। ये कार्य मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना (द्वितीय चरण) के तहत किए गए थे, जिनका भुगतान लंबित बताया जा रहा है।

सीएमओ ने पार्षद द्वारा दिए गए आवेदन को संबंधित शाखा के लिए मार्क कर दिया, लेकिन इसके बाद पार्षद ने प्रस्ताव रजिस्टर देखने की मांग की।


व्यस्तता बताने पर भड़के पार्षद

सीएमओ ने पार्षद से कहा कि वे फिलहाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त हैं और प्रस्ताव रजिस्टर अध्यक्ष की अनुमति के बाद दिखाया जा सकता है। बस इसी बात पर विवाद शुरू हो गया।

आरोप है कि पार्षद प्रभुदयाल राठौर ने गुस्से में आकर सीएमओ के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, गालियां दीं और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें अपमानित किया।


चेंबर के बाहर भी जारी रहा विवाद

सीएमओ के अनुसार, जब वे स्थिति को संभालने के लिए अपने चेंबर से बाहर आए, तब भी पार्षद शांत नहीं हुए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चिल्लाते हुए अपशब्द कहे और धमकियां दीं।

घटना के दौरान नगर परिषद के कर्मचारी और अन्य मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया, वरना मामला और बिगड़ सकता था।


CMO ने जताया जान का खतरा

सीएमओ आरसी अहिरवार ने बंडा थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए पार्षद से अपनी जान को खतरा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद ने न केवल शासकीय कार्य में बाधा डाली, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया।


पुलिस ने दर्ज किया मामला

बंडा थाना प्रभारी अंजली उदेनिया ने बताया कि सीएमओ की शिकायत के आधार पर पार्षद प्रभुदयाल राठौर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इसमें एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराएं शामिल की गई हैं।

पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

इस घटना के बाद स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का व्यवहार न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कानून व्यवस्था की स्थिति को भी चुनौती देता है।


सरकारी कामकाज में बाधा का मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि सरकारी अधिकारी पर इस तरह दबाव बनाता है, तो यह न केवल अनुशासनहीनता है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी खतरा है।


आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो पार्षद के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

यह घटना दर्शाती है कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना कितना जरूरी है। साथ ही, जनप्रतिनिधियों को भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन संयम और मर्यादा के साथ करना चाहिए।

बंडा नगर परिषद का यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें जातीय अपमान और धमकी जैसे गंभीर आरोप जुड़े हुए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *