सागर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। कलेक्टर संदीप जी.आर. के निर्देश पर बण्डा के अनुविभागीय अधिकारी रवीश श्रीवास्तव ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बण्डा का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई डॉक्टर और स्टाफ कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
कलेक्टर संदीप जी.आर. द्वारा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने बिना सूचना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बण्डा पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। इसके अलावा कई स्टाफ कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट कलेक्टर को भेजते हुए संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई का प्रस्ताव दिया है।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों का भी जायजा लिया। उन्होंने प्री और पोस्ट डिलीवरी वार्ड में भर्ती महिलाओं से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना और अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। इसके साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का भी निरीक्षण किया गया, जहां उस समय कोई भी महिला या शिशु भर्ती नहीं मिला।
आकस्मिक निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए डॉक्टरों में डॉ. अंशुल नेमा (एनेस्थेटिस्ट), डॉ. प्रदीप सरवैया (पीजीएमओ), डॉ. मानवेन्द्र सिंह (एमओ), डॉ. हुडा निसार (एमओ) और डॉ. मनीष जैन (एएमओ आरबीएसके) शामिल हैं।

इसके अलावा कई नर्सिंग और अन्य स्टाफ कर्मचारी भी अनुपस्थित मिले। इनमें सेम रजक (एनओ), किरन पटैल (एनओ), कुसुम अहिरवार (एलएचवी), सुचिता साहू (फार्मासिस्ट), हर्षवर्धन (लैब टेक्नीशियन), संतोष पटेल (फिजियो), नीता वर्मा (एनओ), अनुप्रिया दुबे (एएनएम), प्रीति साहू (एएनएम), हेमंत चौरसिया (फार्मासिस्ट आरबीएसके), संध्या यादव (एएनएम), वंदना चौरसिया (फार्मासिस्ट), नेहा पांडेय (आरबीएसके फार्मासिस्ट), खालिद खान (काउंसलर), फूलसिंह गौंड (पंप अटेंडेंट) और गणेश कुर्मी (वार्ड बॉय) शामिल हैं।
अनुविभागीय अधिकारी रवीश श्रीवास्तव ने बताया कि निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रस्ताव कलेक्टर को भेज दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।