सागर। मकरोनिया स्थित दीपक संगीत एवं कला महाविद्यालय के सभागार में 28 और 29 मार्च को प्रथम मध्यप्रदेश बधिर महिला सशक्तिकरण सम्मेलन 2026 के अंतर्गत दो दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन बुंदेलखण्ड बधिर संघ और मध्यांचल बधिर संघ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मूक-बधिर महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाना, उन्हें सशक्त बनाना तथा भारतीय सांकेतिक भाषा और महिलाओं से जुड़े कानूनी अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, भारतीय सांकेतिक भाषा के विशेषज्ञ और बधिर संघों से जुड़े प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने बधिर महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों, उनके अधिकारों और उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के उपायों पर गहन चर्चा की।
सम्मेलन का उद्घाटन सत्र प्रेरणादायक रहा, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि बधिर महिलाएं समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन अक्सर वे अपनी आवाज़ न पहुंचा पाने के कारण कई अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में इस प्रकार के आयोजन उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संगोष्ठी के प्रमुख विषयों में भारतीय सांकेतिक भाषा का महत्व, उसका व्यापक उपयोग और इसे शिक्षा व प्रशासनिक स्तर पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि सांकेतिक भाषा को अधिक व्यापक रूप से अपनाया जाए, तो मूक-बधिर व्यक्तियों के लिए संचार के अवसर बढ़ेंगे और वे समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
कार्यक्रम के दूसरे महत्वपूर्ण पहलू के रूप में महिलाओं से जुड़े कानूनों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, शिक्षा का अधिकार, रोजगार के अवसर और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने सरल और सांकेतिक माध्यम से इन कानूनों को समझाया, जिससे बधिर महिलाएं अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकें और जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग कर सकें।
आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बधिर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना भी है। इसके लिए उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। कई वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सही मार्गदर्शन और समर्थन मिलने पर बधिर महिलाएं भी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
सम्मेलन में भाग लेने वाली महिलाओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और बताया कि इस प्रकार के आयोजन उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होते हैं। इससे उन्हें न केवल नई जानकारी मिलती है, बल्कि वे अन्य लोगों से जुड़कर अपने अनुभव साझा कर पाती हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न इंटरैक्टिव सत्र, कार्यशालाएं और संवाद सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन सत्रों में सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद स्थापित किया गया, जिससे सभी प्रतिभागी सहज रूप से अपनी बात रख सकें।

आयोजन के समापन अवसर पर वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को बधिर महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। उन्हें सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर और सम्मान की जरूरत है। सरकार, समाज और विभिन्न संगठनों को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए, जिससे बधिर महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकें और अपने अधिकारों के साथ जीवन जी सकें।
अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की बात कही। यह सम्मेलन बधिर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जिसने समाज में समावेशिता और समानता के संदेश को मजबूत किया।