नरसिंदी (बांग्लादेश) – नरसिंदी जिले के मस्जिद मार्केट इलाके में शुक्रवार रात 23 वर्षीय चंचल चंद्र भौमिक का जला हुआ शव पाया गया। घटना के समय चंचल जिस गैराज में काम करता था, उसी के अंदर आग लगाकर उसे जिंदा जलाया गया। परिवार और स्थानीय लोग इसे सोची-समझी हत्या बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना रात के समय हुई। चंचल गैराज के अंदर सो रहा था, तभी किसी ने बाहर से पेट्रोल डालकर आग लगाई। आग तेजी से अंदर फैल गई और चंचल रास्ता नहीं निकाल पाया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वह काफी देर तक तड़पता रहा और मदद के लिए चीख रहा था, लेकिन बाहर का शटर लॉक था। सूचना पर फायर सर्विस पहुंची और आग बुझाने में करीब एक घंटे का समय लगा। घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई।

चंचल नरसिंदी शहर के पुलिस लाइंस के पास मस्जिद मार्केट में पिछले 6 साल से काम कर रहा था। वह कमिला जिले के लक्ष्मीपुर गांव का रहने वाला था और परिवार में कमाने वाला इकलौता सदस्य था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। वह बीमार मां और दो भाइयों की देखभाल करता था, जिसमें बड़ा भाई विकलांग है। परिवार ने घटना को क्रूर और सोची-समझी हत्या बताया और जिम्मेदारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
स्थानीय दुकानदार राजीब सरकार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग जानबूझकर शटर पर आग लगाते दिखे। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई दुर्घटना नहीं थी।

इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। उनके शव को पेड़ पर लटका कर आग लगा दी गई थी। पिछले 40 दिनों में बांग्लादेश में 10 हिंदुओं की हत्या की घटनाएं सामने आई हैं।
सुरक्षा और निंदा:
स्थानीय हिंदू नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा की और इसे बर्बर एवं अमानवीय बताया। उन्होंने अधिकारियों से अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अल्पसंख्यकों और कमजोर मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।

पुलिस की प्रतिक्रिया:
नरसिंदी सदर मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी ए.आर.एम. अल मामुन ने घटना की पुष्टि की और बताया कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस ने आसपास के इलाके से सीसीटीवी फुटेज जुटाए हैं और कई टीमें अपराधियों की पहचान व गिरफ्तारी पर काम कर रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस अपराध से जुड़े किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य:
लगभग 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में 2024 के तख्तापलट के बाद हालात अस्थिर हुए हैं। इस्लामी संगठनों की सक्रियता बढ़ने से अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। बांग्लादेश में हिंदू और सूफी मुस्लिम सहित अल्पसंख्यकों की आबादी 10% से भी कम है।
भारत ने लगातार इस मुद्दे पर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का पैटर्न चिंताजनक है और ऐसी घटनाओं से सख्ती से और तुरंत निपटना चाहिए।
इस हृदयविदारक घटना ने नरसिंदी और आसपास के क्षेत्रों में डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। परिवार और समुदाय न्याय की उम्मीद में हैं और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।