बागेश्वर धाम सरकार की पदयात्रा पर मचा बवाल, दलित-पिछड़ा समाज संगठन ने हाईकोर्ट जाने का किया ऐलान 🔥

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भोपाल/दिल्ली, दिनांक 31 अक्टूबर 2025।
दिल्ली के छतरपुर से 7 नवंबर को निकलने वाली “सनातन एकता पदयात्रा” अभी शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन देशभर में इसे लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस यात्रा का नेतृत्व करने वाले हैं, और इसके विरोध में दलित पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव ने न सिर्फ तीखा हमला बोला है, बल्कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की घोषणा भी कर दी है।


🕉️ पृष्ठभूमि: धर्म, राजनीति और सामाजिक असंतोष का संगम

बागेश्वर धाम के युवा कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री, जो अपने चमत्कारिक दावे और “हिंदू राष्ट्र” के नारे के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं, अब एक नई मुहिम के तहत “सनातन एकता पदयात्रा” निकालने जा रहे हैं।
यह यात्रा 7 नवंबर से दिल्ली के छतरपुर मंदिर से शुरू होकर कई राज्यों से गुजरने वाली बताई जा रही है।
शास्त्री का दावा है कि इसका उद्देश्य “सनातन धर्म की एकता और हिंदू संस्कृति के पुनर्जागरण” का संदेश देना है।

लेकिन इस यात्रा को लेकर समाज के एक तबके में गंभीर असंतोष है।
दलित और पिछड़े वर्ग के संगठनों ने इसे “सामाजिक सौहार्द्र तोड़ने की साजिश” बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है।


⚖️ दामोदर यादव का आरोप: “धर्म के नाम पर नफरत फैलाने का षड्यंत्र”

भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव ने कहा —

“धीरेंद्र शास्त्री ने हरियाणा के मंच से न सिर्फ मुझे गालियां दीं बल्कि जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर मेरा मोबाइल नंबर होता तो मोबाइल पर ही ठठरी बार देता। बुंदेलखंड में ‘ठठरी बार देना’ का मतलब होता है आदमी को जला देना। क्या किसी संत की भाषा ऐसी हो सकती है?”

दामोदर यादव ने आगे कहा कि धीरेंद्र शास्त्री की यह यात्रा देश के सामाजिक ढांचे को कमजोर करने का काम करेगी।
उन्होंने कहा —

“वे कहते हैं कि अछूत हमसे दूर हो जा। ये कैसी सनातन एकता है? जो समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने की बात करे, उसे सनातनी कहना पाप होगा।”


🗣️ धीरेंद्र शास्त्री का पलटवार: “हम टेढ़े आदमी हैं, छोड़ेंगे नहीं”

विवाद के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हरियाणा में कथा के दौरान जवाब दिया —

“कुछ लोग हमारी यात्रा रोकने की बात कर रहे हैं, कोर्ट जाने की धमकी दे रहे हैं। उन्हें पता नहीं कि हम बहुत टेढ़े आदमी हैं।
उन्होंने हमें छेड़ा है, अब हम छोड़ेंगे नहीं। आज वो 20 प्रतिशत हैं, आप 9 राज्यों में अल्पसंख्यक हो गए। जिस दिन वो 50 प्रतिशत पहुंच गए, तब आपके ब्रज में भी टोपी वाले नजर आएंगे।”

शास्त्री ने यह भी कहा कि

“भारत को बचाना है, संस्कृति को बचाना है, तो जातिवाद और भेदभाव से ऊपर उठकर सनातन के झंडे तले आना होगा।”

हालांकि उनके इन बयानों को लेकर कई संतों और सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।


🛕 संत समाज में भी मतभेद

दिलचस्प बात यह है कि धीरेंद्र शास्त्री की इस यात्रा को लेकर संत समाज में भी एकता नहीं है।
कुछ संतों ने यात्रा का समर्थन किया है, जबकि कई प्रमुख संत इसे देश के सामाजिक सौहार्द्र के लिए खतरा मान रहे हैं।

एक वरिष्ठ साधु ने कहा —

“धर्म का काम जोड़ना होता है, तोड़ना नहीं। अगर किसी संत की यात्रा से समाज में वैमनस्य फैलने का खतरा है तो उस पर पुनर्विचार होना चाहिए।”


💣 दामोदर यादव के गंभीर आरोप: “भू माफिया हैं धीरेंद्र शास्त्री”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दामोदर यादव ने धीरेंद्र शास्त्री पर भूमि घोटाले के आरोप भी लगाए।
उन्होंने कहा —

“डबरा में सवा सौ एकड़ जमीन पर मंदिर बनाया गया है, जिसकी जमीन पहले एक शुगर मिल को लीज पर दी गई थी।
कंपनी एक्ट के हिसाब से लीज पर ली गई जमीन को कोई व्यक्ति दान में नहीं दे सकता।
उस शुगर मिल के दो मालिक हैं — एक ने दानपत्र लिख दिया, लेकिन दूसरे ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से शिकायत की है।
अगर धीरेंद्र शास्त्री उस अवैध जमीन पर बने मंदिर का उद्घाटन करने जा रहे हैं, तो यह साबित करता है कि वे भू माफिया हैं।”

उन्होंने शास्त्री को “आडंबरी, पाखंडी और संविधान विरोधी व्यक्ति” बताया और कहा कि वे “सत्ता के संरक्षण में बेलगाम हो गए हैं।”


🚩 3 नवंबर को भोपाल में विरोध प्रदर्शन

दामोदर यादव ने घोषणा की है कि
3 नवंबर को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा।
इसमें उनके संगठन के कार्यकर्ता पुतले जलाएंगे, नारेबाजी करेंगे और बाद में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे।

उन्होंने कहा —

“हम राज्यपाल से आग्रह करेंगे कि वे राष्ट्रपति से बात करें और इस यात्रा को रुकवाने के निर्देश दें, क्योंकि यह यात्रा शांति भंग करने और सामाजिक सद्भाव को तोड़ने का काम करेगी।”


🧩 “जाति पात की विदाई” का नारा बनाम व्यवहार

दामोदर यादव ने शास्त्री के “जाति पात की विदाई” वाले नारे पर सवाल उठाते हुए कहा —

“धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि जाति-पात की करो विदाई, हिंदू भाई-भाई।
लेकिन वे खुद अछूत कहकर लोगों को दूर भगाते हैं।
अगर वाकई जातिवाद खत्म करना चाहते हैं, तो अपने घर में दूसरी जाति की बेटी से विवाह करके दिखाएं।”

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा —

“जब खुद जाति-पात की दीवारें ढहाने की बात करते हैं, तो पहले खुद बड़ा दिल दिखाओ।
कुशवाहा समाज के बच्चे को पैर धुलवाने के लिए मजबूर किया गया — क्या यह सनातन की एकता है?”

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