
बिहार के कुख्यात गैंगस्टर चंदन मिश्रा की हत्या: अस्पताल में हुई दिनदहाड़े फायरिंग, मौत की जिद बनी उसकी सबसे बड़ी भूल
पटना: बिहार के चर्चित और कुख्यात गैंगस्टर चंदन मिश्रा की मौत ने एक बार फिर प्रदेश में अपराध की दुनिया और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चंदन मिश्रा को पटना के पारस अस्पताल में पांच हथियारबंद शूटरों ने गोलियों से भून डाला। घटना की जांच में पुलिस जुटी है, लेकिन सामने आई नई जानकारी इस मुठभेड़ की वजह समझने में मदद कर रही है। खबर है कि चंदन मिश्रा की अपनी ही एक जिद ने उसे मौत के मुंह में पहुंचा दिया। अगर वह अस्पताल में डॉक्टर्स की सलाह मान लेता तो शायद आज वह जिंदा होता, लेकिन उसने खुद ही अपनी जान को दांव पर लगा दिया।
पैरोल पर बाहर आया था चंदन मिश्रा, बवासीर के इलाज के लिए था भर्ती
बक्सर का रहने वाला चंदन मिश्रा कई मर्डर और आपराधिक मामलों में नामजद था। उस पर कुल 12 हत्याओं के मामले दर्ज थे और 24 से ज्यादा मुकदमों में वह आरोपी था। कुछ दिन पहले ही उसे बक्सर से भागलपुर जेल ट्रांसफर किया गया था। तभी अचानक तबीयत खराब होने पर उसे पैरोल मिली, ताकि वह बवासीर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हो सके। चंदन 18 जुलाई तक पैरोल पर था। 15 जुलाई को वह पारस अस्पताल में भर्ती हुआ था।
डॉक्टर्स की सलाह के खिलाफ खुद की जिद बनी मौत की वजह
चंदन की बीमारी ऐसी गंभीर नहीं थी कि उसे ज्यादा दिन अस्पताल में रहना पड़े। डॉक्टरों ने 16 जुलाई को उसे अस्पताल से छुट्टी देने की बात कही थी। लेकिन चंदन ने डॉक्टरों से अनुरोध किया कि उसे एक दिन और अस्पताल में रखा जाए, यानि वह 17 जुलाई तक अस्पताल में रहना चाहता था। यही जिद उसके लिए घातक साबित हुई।
दिनदहाड़े अस्पताल में हमला, पुलिसकर्मी भी रहे निष्क्रिय
17 जुलाई को दिन के समय तौसीफ उर्फ बादशाह अपने साथियों सहित अस्पताल पहुंचे। उनके पास 9 एमएम पिस्टल थी। पांच शूटरों ने चंदन मिश्रा के कमरे में घुसकर उसे गोलियों से भून दिया। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में यह पूरी घटना कैद हो गई है। घटना के समय कमरे के बाहर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था, जिससे हमलावरों को आसानी से हमला करने का मौका मिला।
अगर 16 जुलाई को छूट जाता तो बच सकता था जान
विशेषज्ञों और पुलिस के अनुसार अगर चंदन 16 जुलाई को ही अस्पताल से छुट्टी ले लेता, तो उसकी जान बच सकती थी। इससे चंदन के दुश्मनों को अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिलता। चंदन की इस जिद ने दुश्मनों को उसे खत्म करने का पूरा मौका दे दिया।
हत्या के बाद दर्ज हुए दो मामले, चुनावी सरगर्मी के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता
चंदन मिश्रा की हत्या के मामले में फिलहाल दो केस दर्ज किए गए हैं। यह हत्या बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस इस घटना की गंभीरता से जांच कर रही है और हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।
पुलिस जांच जारी
पटना पुलिस और क्राइम ब्रांच मामले की गहनता से जांच कर रही है। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है। पुलिस के उच्च अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा में चूक के कारणों का पता लगाने में जुटे हैं। साथ ही अपराधियों के नेटवर्क को भी तोड़ने के प्रयास जारी हैं।
चंदन मिश्रा की मौत केवल एक गैंगस्टर की हत्या नहीं, बल्कि बिहार की कानून व्यवस्था पर एक बड़ी चोट है। उसकी अस्पताल में रुकने की जिद ने उसकी जान लेने का मौका दुश्मनों को दिया। पुलिस की कार्यवाही और राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था अब इस तरह की घटनाओं को रोकने की कसौटी साबित होगी। आने वाले दिनों में इस मामले की आगे की जांच और खुलासे पर सभी की नजर बनी रहेगी।