बीना के ग्राम पंचायत ढिमरौली के भाकरई गांव में बीपीसीएल द्वारा बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध !

Spread the love

घटना का सार:

बीना रिफाइनरी द्वारा बीना रिफाइनरी बाउंड्री वॉल का निर्माण ग्राम पंचायत ढिमरौली के भाकरई गांव में किया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य से संबंधित एक विवाद उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा बनाई जा रही यह दीवार उनके मकानों से बहुत पास बनाई जा रही है, जिसके कारण उनके घरों का सुरक्षा खतरे में है। साथ ही, निर्माण के कारण गांव का आने-जाने का रास्ता भी बंद हो सकता है। इस पर ग्रामीणों ने विरोध करते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप:

ग्राम के लोग, जैसे कि लक्ष्मण सिंह और सुरेंद्र सिंह, ने आरोप लगाया कि कंपनी ने पहले से ही खुदाई का काम शुरू कर दिया है और यह कार्य उनके मकानों के नजदीक हो रहा है। उनका कहना है कि दीवार के निर्माण से न केवल उनके मकानों की सुरक्षा पर संकट आएगा, बल्कि ग्रामीणों के लिए आम रास्ता भी बंद हो जाएगा, जो उनके लिए बड़ी असुविधा का कारण बनेगा।

इस विवाद के बाद, ग्रामीणों ने शुक्रवार को नायब तहसीलदार हेमराज मेहर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने एसडीएम के नाम पर शिकायत की। ज्ञापन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि कंपनी ने सीमांकन के बावजूद उनकी निजी जमीन का भी अधिग्रहण कर लिया है। इसके अतिरिक्त, जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो कंपनी के गार्डों ने उन्हें धमकाया और उन्हें चुप रहने की धमकी दी।

विरोध और दावे:

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने निर्धारित सीमा का उल्लंघन करते हुए उनकी निजी संपत्ति को भी प्रभावित किया है। इसमें खासकर किसानों की निजी जमीन का भी अधिग्रहण किया गया है। लक्ष्मण सिंह और सुरेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि निर्माण कार्य के दौरान उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं।

ग्रामीणों का समर्थन:

ज्ञापन सौंपने के दौरान राघवेंद्र सिंह, हनुमत सिंह, सीताराम सिंह ठाकुर, भज्जू, मोतीलाल, गंगाराम, कल्लू और मोहन समेत कई अन्य ग्रामीण मौजूद थे। उन्होंने भी इस निर्माण कार्य के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और प्रशासन से इस मुद्दे पर जल्द समाधान की उम्मीद जताई।

प्रशासन की भूमिका:

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन शीघ्र कदम नहीं उठाता है, तो उनका जीवन और संपत्ति खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने नायब तहसीलदार से निवेदन किया है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। प्रशासन से उनकी मांग है कि यह दीवार उनके घरों से सुरक्षित दूरी पर बनाई जाए और रास्ते को भी बंद न किया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निजी भूमि का कोई अवैध अधिग्रहण न हो।

बीपीसीएल का दृष्टिकोण:

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) द्वारा बाउंड्री वॉल का निर्माण रिफाइनरी की सुरक्षा के लिहाज से किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी का यह दावा है कि निर्माण कार्य सभी कानूनी प्रावधानों के तहत हो रहा है और सभी संबंधित अधिकारियों से अनुमति ली गई है। इसके बावजूद, यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि जब बड़े विकास कार्य होते हैं, तो स्थानीय लोगों की चिंताएं भी अहम हो जाती हैं।

संभावित समाधान:

इस विवाद का समाधान तभी संभव है जब प्रशासन, बीपीसीएल और ग्रामीणों के बीच संवाद स्थापित हो। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीणों के अधिकारों का उल्लंघन न हो और साथ ही विकास कार्य भी सुचारू रूप से पूरे हों। ग्रामीणों की मांग है कि एक बार फिर से सीमांकन की जांच की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि बाउंड्री वॉल उनके घरों और कृषि भूमि से दूर बनाई जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि रास्ता बंद न हो और उनके दैनिक जीवन में कोई विघ्न न आए. यह मामला बीना रिफाइनरी के विकास कार्य और ग्रामीणों के अधिकारों के बीच एक संघर्ष को दर्शाता है। प्रशासन और बीपीसीएल के लिए यह एक चुनौती है कि वे दोनों पक्षों के बीच संतुलन बना सकें और एक समाधान पर पहुंच सकें जो सभी के लिए लाभकारी हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *