बीना। बीना, खुरई और राहतगढ़ क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में रविवार को रंगपंचमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। होली के पांच दिन बाद आने वाले इस पर्व पर सुबह से ही शहर और ग्रामीण इलाकों में रंग-गुलाल उड़ता नजर आया। दिनभर धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
प्रभात फेरी से हुई दिन की शुरुआत

बीना नगर में सुबह भगवान राधा-कृष्ण को समर्पित भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। श्रद्धालु ढोलक और मंजीरे की थाप पर भजन गाते हुए नगर की विभिन्न गलियों से गुजरे। इस दौरान लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर रंगपंचमी की शुभकामनाएं देते नजर आए। प्रभात फेरी में महिलाओं, युवाओं और बच्चों की अच्छी भागीदारी रही, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बन गया।
राजनीतिक कार्यालयों में भी मनाया गया पर्व
रंगपंचमी का उत्साह राजनीतिक गलियारों में भी देखने को मिला। विधायक कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेली और ढोल की थाप पर जमकर नृत्य किया।
वहीं शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेता प्रतिपक्ष प्रशांत राय के साथ रंग-गुलाल खेलकर भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर पर्व की बधाई दी।

धार्मिक स्थलों पर हुए आयोजन
रंगपंचमी के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। रेलवे के मुख्य टिकट निरीक्षक नरेंद्र जाटव एवं प्रमेंद्र जाटव द्वारा नरसिंह मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया। यहां भजन-कीर्तन का कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।
उधर राहतगढ़ ब्लॉक के प्रसिद्ध मड़खेड़ा धाम में गुरु पवन पाराशर के सानिध्य में भक्तों ने रंगपंचमी का पर्व मनाया। यहां आयोजित दिव्य दरबार में भजन-कीर्तन के बीच भक्तों ने नृत्य कर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे परिसर में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।
बुंदेली फाग की परंपरा ने बढ़ाया उत्साह

बुंदेलखंड की विशिष्ट लोक परंपरा के अनुसार होली से शुरू हुआ फाग गीतों का सिलसिला रंगपंचमी के दिन अपने चरम पर पहुंच गया। ग्रामीण क्षेत्रों में ढोलक और नगाड़ों की थाप पर फाग टोलियां पारंपरिक बुंदेली गीत गाती नजर आईं। गांव-गांव में लोग समूह बनाकर फाग गाते हुए एक-दूसरे के घर पहुंचते रहे और गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां साझा करते रहे।
मझेरा गांव के मनोज तिवारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में फाग की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। यह लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है, जिसमें गांव के सभी लोग मिलकर हिस्सा लेते हैं।
प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्ण आयोजन

पर्व के दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की व्यवस्था की गई थी, जिससे सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
दिनभर रंग-गुलाल, भजन-कीर्तन और फाग गीतों के बीच मनाया गया रंगपंचमी का यह पर्व क्षेत्र में उत्साह, भाईचारे और लोक संस्कृति की झलक पेश करता नजर आया। शाम तक लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं और उत्सव का आनंद लिया।