बीना, सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना शहर में खुरई महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय में आंगनवाड़ी सहायिका को नोटिस जारी होने के बाद तनावपूर्ण स्थिति बन गई। मुकरामपुर आंगनवाड़ी केंद्र की सहायिका गीता राय को परियोजना अधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद उनके परिजनों और अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक और अभद्रता का मामला सामने आया है। परियोजना अधिकारी वर्षा रघुवंशी ने बीना शहरी थाने में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

विवाद की शुरुआत: नोटिस और निरीक्षण
मामला मुकरामपुर आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ा है, जहां परियोजना अधिकारी वर्षा रघुवंशी ने हाल ही में निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान केंद्र में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें कार्य में लापरवाही और नियमों का उल्लंघन शामिल था। इसके आधार पर वर्षा रघुवंशी ने आंगनवाड़ी सहायिका गीता राय को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में गीता से अनियमितताओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया था।
नोटिस मिलने के बाद गीता राय अपने पति भूपेंद्र राय और ससुर जगदीश राय के साथ परियोजना कार्यालय पहुंचीं। यहीं से मामला गंभीर हो गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्रता और गलत व्यवहार का आरोप लगाया है।
दोनों पक्षों के आरोप
परियोजना अधिकारी का पक्ष: वर्षा रघुवंशी का कहना है कि उन्होंने अपने कर्तव्य के तहत नोटिस जारी किया था, और गीता राय को केवल इसका लिखित जवाब देना था। इसके बजाय, गीता अपने परिजनों के साथ कार्यालय पहुंची और उनके साथ अभद्रता की। वर्षा ने आरोप लगाया कि गीता के पति भूपेंद्र और ससुर जगदीश ने उन्हें धमकी दी और कार्यालय में हंगामा किया। इस घटना के बाद वर्षा ने बीना शहरी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने धमकी और शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
गीता राय का पक्ष: दूसरी ओर, गीता राय का कहना है कि वे नोटिस का जवाब देने के लिए कार्यालय गई थीं, लेकिन परियोजना अधिकारी ने उनके साथ अभद्रता की। गीता का दावा है कि नोटिस में उल्लिखित अनियमितताएं गलत हैं, और अधिकारी ने उनके साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। गीता के परिजनों का कहना है कि वे केवल अपनी बात रखने गए थे, लेकिन अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी और उल्टा उन पर गलत आरोप लगाए।

राजनीतिक कनेक्शन और जटिलता
मामले को और जटिल बनाता है गीता राय की सास प्रेमरानी राय का जनपद सदस्य होना। जानकारी के अनुसार, मुकरामपुर आंगनवाड़ी केंद्र का कामकाज गीता के पति भूपेंद्र राय और उनके पुत्र संभालते हैं, जबकि गीता का नाम केवल औपचारिक तौर पर सहायिका के रूप में दर्ज है। यह स्थिति अनियमितताओं का एक प्रमुख कारण हो सकती है, क्योंकि आंगनवाड़ी सहायिका का काम स्वयं गीता को करना चाहिए। इस बात को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा गर्म है कि क्या नोटिस के पीछे राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत रंजिश का कोई कोण है।
पुलिस जांच और कार्रवाई
परियोजना अधिकारी वर्षा रघुवंशी की शिकायत के आधार पर बीना शहरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) और धारा 296 (शासकीय कार्य में बाधा) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, और कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों और साक्षियों से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या घटना के दौरान कोई गंभीर धमकी दी गई थी या यह केवल तर्क-वितर्क तक सीमित थी।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह घटना बीना में आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है। आंगनवाड़ी केंद्र सरकार की एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और किशोरियों के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। ऐसे में, केंद्रों में अनियमितताएं और कर्मचारियों के बीच विवाद योजना की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में अक्सर कर्मचारियों की अनुपस्थिति और कार्य में लापरवाही की शिकायतें सामने आती हैं। इस मामले ने इन मुद्दों को और उजागर किया है। कुछ लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन को सभी आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सहायिकाएं और कार्यकर्ता स्वयं अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।