बीना में किसानों का आंदोलन: कृषि मंत्री को ढूंढते हुए पोस्टर के साथ प्रदर्शन, खाद की कमी से नाराज

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बीना, 8 सितंबर 2025: रबी सीजन में खाद की कमी से नाराज किसानों ने सोमवार को तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा और उत्पादन की चिंता को लेकर कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना को ढूंढते हुए पोस्टर लेकर तहसील परिसर में घूमते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में डीएपी और यूरिया की सप्लाई समय पर नहीं हो रही है, जिससे उनकी तैयार फसल पर प्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

किसानों की प्रमुख शिकायतें
किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के संभागीय अध्यक्ष सीताराम ठाकुर ने कहा कि रबी सीजन के लिए क्षेत्र में 3500 टन डीएपी और 2200 टन यूरिया की आवश्यकता है। बीते डेढ़ महीने से खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने बताया कि मसूर, चना और मटर जैसी प्रमुख फसलों की कटाई के समय खाद की अनुपलब्धता से उत्पादन घट सकता है।

किसानों ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में यह भी मांग की कि मंडी परिसर में 10 टन क्षमता का धर्मकांटा लगाया जाए, ताकि कृषि उत्पादन के उचित मापदंड बनाए जा सकें। साथ ही उन्होंने हम्माली शुल्क बंद करने की भी मांग रखी।

कृषि मंत्री की अनुपस्थिति पर नाराजगी
संभागीय अध्यक्ष ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खाद की कमी, बाढ़ प्रभावितों की राहत व्यवस्था और किसानों की अन्य समस्याओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इन मुद्दों पर कृषि मंत्री को सामने आकर किसानों को आश्वस्त करना चाहिए था, लेकिन अब तक मंत्री न तो कोई बयान जारी कर सके और न ही किसानों की चिंता व्यक्त की। यही कारण है कि किसान मंत्री के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

प्रदर्शन की रूपरेखा
सोमवार दोपहर एक बजे किसान तहसील परिसर के मुख्य गेट पर जमा हुए। इस दौरान किसान शांति और अनुशासन के साथ अपनी मांगें रख रहे थे। मौके पर एसडीएम विजय डेहरिया पहुंचे और किसानों से बातचीत की। उन्होंने कृषि अधिकारी से खाद की उपलब्धता और सप्लाई की स्थिति की जानकारी लेने का आश्वासन दिया।

प्रदर्शन में सीताराम ठाकुर, दशरथ अहिरवार, सत्यपाल पटेल सहित कई किसान शामिल थे। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर समय पर खाद की सप्लाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

विश्लेषक कहते हैं:
किसानों का यह आंदोलन केवल खाद की कमी तक सीमित नहीं है। यह राज्य में कृषि नीतियों की प्रभावशीलता और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने का संकेत भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि राज्य सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो रबी सीजन में उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है और किसानों में असंतोष और बढ़ सकता है।


बीना में किसानों का यह प्रदर्शन सरकार के लिए चेतावनी है कि उनके साथ संवाद और समय पर कार्रवाई न करना गंभीर परिणाम दे सकता है। किसान न केवल अपनी फसलों की सुरक्षा चाहते हैं, बल्कि यह भी चाहते हैं कि उनके मुद्दों को गंभीरता से लिया जाए। कृषि मंत्री की अनुपस्थिति ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी है, और आंदोलन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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