सागर लोकायुक्त टीम ने बीना जनपद पंचायत कार्यालय में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहरना ग्राम पंचायत के सचिव हरिराम कुशवाहा को 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब सचिव पंचायत के काम के बिल पास कराने के बदले सरपंच से रिश्वत की मांग कर रहा था। लोकायुक्त टीम की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी भ्रष्टाचार की पोल खोली है, और इस गिरफ्तारी से पंचायत विभाग में फैली भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर किया है।

घटना का विवरण:
यह घटना बीना जनपद पंचायत कार्यालय की है, जहां बिहरना ग्राम पंचायत के सचिव हरिराम कुशवाहा ने सरपंच अरविंद उर्फ लालू राय से काम के बिल पास करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। सचिव ने बिल की राशि के भुगतान के लिए 5 प्रतिशत की रिश्वत मांगी, जो कि कुल 11 हजार रुपए थी। सरपंच के बेटे रनवीर राय के अनुसार, सचिव पिछले दो महीनों से उन्हें परेशान कर रहा था।
रनवीर ने बताया कि 20 नवंबर को सचिव ने उन्हें भुगतान के लिए बुलाया था, लेकिन तब भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद, 25 नवंबर को सचिव ने फिर से 16 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की, जिसके बाद 11 हजार रुपए में डील तय हुई। जब भुगतान के लिए पैसे दिए जाने थे, तो सरपंच ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज करवाई और रिश्वत देने का समय तय किया।
लोकायुक्त टीम की कार्रवाई:
गुरुवार को सरपंच ने लोकायुक्त टीम के साथ मिलकर पैसे देने के लिए सचिव के पास पहुंचे। जैसे ही सचिव ने 11 हजार रुपए प्राप्त किए, लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथ उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त निरीक्षक केपी एस बैन, निरीक्षक अभिषेक वर्मा, प्रधान आरक्षक अजय क्षेत्री, आरक्षक संतोष गोस्वामी, अरविंद नायक, आसुतोष व्यास और सुरेंद्र सिंह मौजूद थे।

विरोधी की प्रतिक्रियाएँ:
इस घटना के बाद लोकायुक्त की टीम और सागर प्रशासन ने सराहनीय कदम उठाया है। लोकायुक्त द्वारा की गई इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्त नीति को उजागर किया है। इस कार्रवाई के बाद अब पंचायत सचिवों और अन्य सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश जाएगा कि रिश्वत लेना और देना अब स्वीकार्य नहीं है और ऐसे कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
घोषणा और सख्त कदम:
लोकायुक्त की यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार की घटनाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रखने और सरकारी कर्मचारियों को रिश्वतखोरी से बचने के लिए जागरूक करने की जरूरत है। इस गिरफ्तारी से लोकायुक्त ने यह संदेश दिया कि सरकार ऐसे भ्रष्टाचारियों को कोई छूट नहीं देगी और जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे।
आगे की कार्रवाई:
पुलिस और लोकायुक्त टीम अब इस मामले की विस्तृत जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे मामलों में दोषियों को पूरी सजा मिल सके। साथ ही लोकायुक्त टीम द्वारा सरपंच की शिकायत पर की गई इस कार्रवाई से पंचायत कार्यालयों में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों में भी एक डर और चेतावनी का माहौल बनेगा, ताकि भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी अपने कृत्यों को त्यागें और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करें।
इस गिरफ्तारी के बाद सागर लोकायुक्त विभाग की सक्रियता को देखते हुए कई अन्य मामलों में भी जांच की जा सकती है, जिससे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं और सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।