कचरा, गंदगी, रिसता पानी और आवारा मवेशियों से यात्रियों की परेशानी चरम पर
बीना (सागर)। मध्यप्रदेश के सबसे व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक बीना जंक्शन इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार है। हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस स्टेशन पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। प्लेटफॉर्म और परिसर में कचरे के ढेर, पॉलीथिन, पानी की बोतलें और खाने-पीने के पैकेट हर जगह बिखरे पड़े हैं। इस गंदगी से यात्रियों को तो परेशानी हो ही रही है, स्टेशन की छवि भी धूमिल हो रही है।

प्लेटफॉर्म पर फैला गंदा पानी – हादसों का खतरा
स्टेशन पर नलों और बाथरूम से लगातार पानी रिसता रहता है। इससे प्लेटफॉर्म पर पानी भर जाता है और फिसलन बनी रहती है।
- बुजुर्ग और बच्चे अक्सर गिरने से बाल-बाल बचते हैं।
- कीचड़ और गंदगी के बीच से गुजरकर यात्रियों को ट्रेन तक पहुंचना पड़ता है।
- शौचालयों से भी पानी रिसकर बाहर आता है, जिससे स्थिति और विकट हो जाती है।
आवारा जानवरों का आतंक
स्टेशन परिसर में आवारा बैल और मवेशी खुलेआम घूमते रहते हैं।
- हाल ही में एक यात्री बैल की टक्कर से घायल हुआ।
- जानवरों की भीड़ से महिलाएं और बच्चे ज्यादा प्रभावित हैं।
- ट्रेन में चढ़ने-उतरने के दौरान इन मवेशियों से यात्रियों को अक्सर टकराव का खतरा बना रहता है।

शौचालयों की दयनीय हालत
स्टेशन पर मौजूद शौचालयों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है।
- गंदगी और दुर्गंध से यात्री इनका इस्तेमाल करने से बचते हैं।
- खासकर महिला और दिव्यांग यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
- स्वच्छ भारत अभियान के दावे स्टेशन पर कहीं नजर नहीं आते।
यात्रियों की राय
सागर जिले के यात्री राकेश यादव ने बताया—
“स्टेशन पर कीचड़ और कचरे से होकर गुजरना पड़ता है। ट्रेन पकड़ने का अनुभव यातना से कम नहीं है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को संभालना मुश्किल हो जाता है।”

शिकायतों पर ध्यान नहीं
यात्रियों की ओर से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है।
- सफाई कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है।
- कचरा निपटान और जल निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं।
- जिम्मेदार अधिकारी समस्याओं को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य संतोष ठाकुर ने आश्वासन दिया है कि वे इन समस्याओं को डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) के समक्ष गंभीरता से उठाएंगे।
यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा
बीना स्टेशन पर फैली गंदगी, रिसता पानी और आवारा जानवर न सिर्फ स्वास्थ्य संकट है, बल्कि यह सुरक्षा जोखिम भी है। रेल प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण यात्रियों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है।