बीना सिविल अस्पताल की गंदगी पर पार्षद का एकदिवसीय उपवास !

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बीना सिविल अस्पताल में फैली गंदगी और लचर सफाई व्यवस्था के विरोध में नानक वार्ड के पार्षद बी.डी. रजक रविवार को एक दिवसीय उपवास पर बैठ गए। यह कदम अस्पताल के वात्सल्य प्रसूति गृह सहित विभिन्न वार्डों में गंदगी को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद उठाया गया।

पार्षद के इस कदम से स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में हलचल मच गई।


📍 उपवास की सूचना मिलते ही पहुंची नपाध्यक्ष

उपवास की जानकारी मिलते ही नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार और बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल मौके पर पहुंचे। इस दौरान समाजसेवी हन्नू राजपूत भी उपस्थित रहे।

जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया। वार्ड, प्रसूति गृह और शौचालयों की स्थिति देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। परिसर में जगह-जगह गंदगी और कचरे का अंबार पाया गया।


☎️ सीएमएचओ से की चर्चा

निरीक्षण के बाद नपाध्यक्ष लता सकवार ने सागर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी से फोन पर चर्चा कर तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का आग्रह किया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है और इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


🗣️ “मजबूरी में करना पड़ा उपवास”

पार्षद बी.डी. रजक ने कहा कि अस्पताल की स्थिति इतनी खराब थी कि वहां दो मिनट रुकना भी मुश्किल था। उन्होंने बताया,
“यहां इलाज के लिए आने वाले लोग ठीक होने की बजाय और बीमार पड़ सकते हैं। संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ, इसलिए मजबूरन उपवास करना पड़ा।”

उनका कहना था कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


✅ सोमवार से सफाई का आश्वासन

उपवास के दौरान प्रशासन ने आश्वासन दिया कि सोमवार से नगर पालिका की ओर से नियमित सफाई कराई जाएगी। साथ ही लापरवाही बरतने वाले सफाई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आश्वासन मिलने के बाद पार्षद ने अपना उपवास समाप्त कर दिया।


⚠️ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता है, खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जा रहे हैं।

बीना सिविल अस्पताल की दुर्दशा ने यह संकेत दिया है कि नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

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