बीना, 2 जुलाई 2025।
सिविल अस्पताल बीना की बदहाल व्यवस्थाएं मरीजों के साथ मजाक बनती जा रही हैं। तमाम विभागीय प्रयासों और अधिकारियों के फेरबदल के बावजूद अस्पताल की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बीते दो दिनों से हो रही रिमझिम बारिश ने अस्पताल की छत की लीकेज को उजागर कर दिया है। पानी टपकने से वार्डों में गंदगी, बदबू और अव्यवस्था फैल गई है, जिससे मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान हैं।

बाल्टियों से रोकी जा रही बारिश, दीवारों से रिसाव और सीलन बनी मुसीबत
अस्पताल के अंदर छत से टपकते पानी को रोकने के लिए कर्मचारियों ने बाल्टियां रख दी हैं, लेकिन इससे कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। दीवारों से पानी रिसने और सीलन के कारण पूरे परिसर में दुर्गंध फैल रही है। इतना ही नहीं, मरीजों को बिना बेडशीट के पलंग पर लेटना पड़ रहा है और सफाई व्यवस्था भी चरमरा चुकी है।
बीएमओ की कुर्सी बनी ‘संकटग्रस्त पद’, चार बार बदले आदेश
अस्पताल की कुव्यवस्था के पीछे सबसे बड़ा कारण जिम्मेदार पदों पर स्थायित्व का अभाव है। दिसंबर 2024 में तत्कालीन बीएमओ डॉ. अरविंद गौर को भ्रष्टाचार के आरोपों में हटाया गया। इसके बाद सागर के डॉ. अभिषेक यादव को चार्ज देने की कोशिश हुई, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
फिर डॉ. दीपक तिवारी के नाम आदेश हुए, लेकिन उन्होंने भी चार्ज नहीं लिया। डॉ. संजीव अग्रवाल को दो बार बीएमओ नियुक्त किया गया, पर वे मेडिकल अवकाश पर चले गए। बाद में डॉ. राजेश पस्तौर को आदेश दिए गए, लेकिन उन्होंने भी जिम्मेदारी संभालने से मना कर दिया।

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर दोबारा संजीव अग्रवाल को जिम्मेदारी
पिछले दिनों बीना दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश के बाद डॉ. संजीव अग्रवाल को पुनः बीएमओ बनाया गया है, लेकिन अस्पताल की जमीनी स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है।

प्रभारी बोले – लीकेज रोकने मिस्त्री बुलाया, एसडीएम ने दिए निर्देश
अस्पताल प्रभारी डॉ. संजीव अग्रवाल ने कहा कि छत से टपकते पानी की समस्या को दूर करने मिस्त्री को बुलाया गया है और जल्द सुधार कार्य शुरू होगा। वहीं एसडीएम विजय डेहरिया ने कहा कि उन्होंने बीएमओ को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं और वे खुद निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाएंगे।
- बारिश में अस्पताल की छत से टपक रहा पानी
- दीवारों से सीलन, बदबू और गंदगी से मरीज परेशान
- बार-बार बदले जा रहे बीएमओ, व्यवस्था अस्थिर
- स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद भी सुधार अधर में
- प्रशासनिक निरीक्षण और सुधार कार्य की उम्मीद