बुंदेलखंड की पारंपरिक मार्शल आर्ट और अखाड़ा संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले सागर-छत्रसाल अखाड़े के उस्ताद भगवानदास रैकवार को भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। 83 वर्ष की आयु में भी खेल और अखाड़ा संस्कृति के प्रति समर्पित उस्ताद भगवानदास ने अपनी निस्वार्थ सेवा से इस प्राचीन परंपरा को जीवित रखा है।

विधायक प्रदीप लारिया ने दी बधाई
इस गौरवपूर्ण अवसर पर नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया उस्ताद भगवानदास के निवास पहुंचे। उन्होंने उस्ताद जी को पुष्पगुच्छ भेंट किया और हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं। विधायक लारिया ने कहा कि यह सम्मान केवल उस्ताद भगवानदास के लिए ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की मिट्टी और हमारी समृद्ध शौर्य परंपरा के लिए भी गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि उस्ताद जी का जीवन और उनकी निष्ठा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक है।

गणमान्य लोग भी मौजूद
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष मिहीलाल जी, पूर्व मंडल अध्यक्ष श्री आफीसर यादव जी, पार्षद श्री बलवंत ठाकुर जी, श्री नरेंद्र ठाकुर जी सहित अन्य गणमान्यजन भी उपस्थित रहे। सभी ने उस्ताद भगवानदास के योगदान की सराहना की और उन्हें बधाई दी।

अखाड़ा संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान
उस्ताद भगवानदास रैकवार ने बुंदेलखंड की प्राचीन मार्शल आर्ट और अखाड़ा परंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में सागर-छत्रसाल अखाड़ा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना नाम रोशन किया है।
इस सम्मान ने न केवल उस्ताद भगवानदास को बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। स्थानीय लोगों ने कहा कि उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है और यह पुरस्कार उनके समर्पण और उत्कृष्ट योगदान की मान्यता है।