विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान खुरई के विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने कहा कि जल संसाधन प्रबंधन बुंदेलखंड के विकास और भविष्य को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जल संकट की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन समुचित जल प्रबंधन और सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन से कृषि, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है।
विधायक ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र लगभग 55 लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुका है और सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028-29 तक यह क्षेत्र 1 करोड़ हेक्टेयर तक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य प्राप्त होने से न केवल किसान आत्मनिर्भर होंगे, बल्कि क्षेत्र की कृषि उत्पादकता और आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

शैलेंद्र कुमार जैन ने केन-बेतवा लिंक परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड के जल संकट को दूर करने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास में ऐतिहासिक साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से न केवल सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि जल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन में भी मदद मिलेगी।
विधायक ने कहा कि जल संरक्षण, जल संचयन और नदियों के लिंक से क्षेत्र में स्थायी विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से जल संरक्षण के विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनमें किसानों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
शैलेंद्र कुमार जैन ने विधानसभा में कहा कि बुंदेलखंड का भविष्य जल संसाधन प्रबंधन से सीधे जुड़ा हुआ है और यदि इस दिशा में सही समय पर ठोस कार्य किए गए, तो क्षेत्र की कृषि, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार के साथ सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य जल प्रबंधन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करेंगे, जिससे बुंदेलखंड में पानी की कमी और सूखे जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी और क्षेत्र विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा।
विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि जल संसाधन प्रबंधन सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, पेयजल आपूर्ति और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती देगा, जिससे बुंदेलखंड का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।