बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई PFT और FOT जांच सुविधा, फेफड़ों के मरीजों को बड़ी राहत !

Spread the love

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब बीएमसी में फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों की सटीक जांच के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PFT) और फोर्स्ड ऑस्सीलेशन टेक्नीक (FOT) की अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं। इस नई सुविधा से पूरे संभाग के मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा।

अब तक फेफड़ों की जटिल जांच के लिए मरीजों को निजी जांच केंद्रों या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त परेशानी होती थी। बीएमसी में यह सुविधा शुरू होने से अब मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत जांच उपलब्ध हो सकेगी।


फिजियोलॉजी और रेस्पिरेटरी विभाग के संयुक्त प्रयास

यह सुविधा बीएमसी के फिजियोलॉजी एवं रेस्पिरेटरी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुरू की गई है। अत्याधुनिक मशीनों से युक्त इस यूनिट का लोकार्पण बीएमसी के डीन डॉ. पीएस ठाकुर एवं अधीक्षक डॉ. राजेश जैन द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डीन डॉ. ठाकुर ने कहा कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए बीएमसी लगातार आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। PFT और FOT जांच शुरू होने से श्वसन रोगों के निदान में सटीकता आएगी और मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सकेगा।


ओपीडी कक्ष क्रमांक 12 में मिलेगी जांच सुविधा

बीएमसी प्रशासन के अनुसार, मरीज सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी कक्ष क्रमांक 12 में पहुंचकर PFT और FOT जांच करा सकते हैं। यह सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध रहेगी, जिससे दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी सहूलियत होगी।


अस्थमा, सीओपीडी सहित कई बीमारियों का होगा सटीक निदान

बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इन जांचों के माध्यम से:

  • अस्थमा एवं सांस फूलने की समस्या
  • क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)
  • पल्मोनरी फाइब्रोसिस (फेफड़ों का कड़ा होना)
  • श्वसन तंत्र से जुड़े अन्य गंभीर संक्रमण

जैसी बीमारियों की पहचान और गंभीरता का सटीक आकलन किया जा सकेगा। PFT और FOT तकनीक से मरीज के फेफड़ों की कार्यक्षमता का वैज्ञानिक विश्लेषण संभव होगा, जिससे इलाज की दिशा तय करने में चिकित्सकों को मदद मिलेगी।


पीजी छात्रों और रिसर्च के लिए भी अहम कदम

यह सुविधा केवल मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि बीएमसी के पीजी विद्यार्थियों के लिए भी शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता से छात्रों को क्लीनिकल ट्रेनिंग का बेहतर अवसर मिलेगा और श्वसन रोगों से संबंधित रिसर्च एवं अध्ययन कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।


कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक रहे मौजूद

इस अवसर पर फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रविकांत अरजरिया, पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. तल्हा साद सहित डॉ. अमरदीप राय, डॉ. अंजु झा, डॉ. रीमा गोस्वामी, डॉ. रमेश पांडेय, डॉ. सर्वेश जैन, डॉ. सत्येंद्र उइके, डॉ. आशीष जैन, डॉ. सत्येंद्र मिश्रा, डॉ. प्रियांशु समेत अनेक चिकित्सक, अधिकारी एवं स्टाफ मौजूद रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *